Africal-Blackwood-

African Blackwood: आपने अपने घर के पुराने फर्नीचरों को देखा होगा, दादा-दादी या फिर मम्मी पापा से उसके पुराने और टिकाउ होने के किस्से भी सुने होंगे. कुछ एक घरों में तो दादा-दादी की पहली कमाई से खरीदी गई चारपाई, बेड या कुर्सी आज भी मौजूद होगी. कुल मिलाकर आप इस बात से भलि भांति परिचित भी होंगे कि जितनी मजबूत लकड़ी, उसके दाम उतने ही ज्यादा. हिंदुस्तान में आमतौर पर शीशम की लकड़ी को सबसे मजबूत माना जाता हैं, हालांकि चंदन की लकड़ी भी खासी महंगी होती है लेकिन वह अपनी मजबूती के अलावा अन्य कारणों की वजह से जानी जाती है. खैर, आज हम आपको ऐसी लकड़ी के बारे में बताने जा रहे हैं जिसकी कीमत चंदन या शीशम से कई गुना ज्यादा होती है. African Blackwood इतनी महंगी कि इसके फर्नीचर के दाम में आप लग्जरी गाड़ी या हीरे-जवाहरात खरीद सकते हैं. 

African Blackwood के दाम

जिस लकड़ी के बारे में हम बात कर रहे हैं उसका नाम है अफ्रीकन ब्लैकवुड (African Blackwood). इसे दुनिया की सबसे महंगी लकड़ी माना जाता है, साथ ही यह दुनिया की सबसे मूल्यवान सामानों में भी गिनी जाती है. इस लकड़ी की एक किलोग्राम की कीमत साठ हजार पाउंड, यानी करीब सात लाख रुपये तक होती है. अब तो आप समझ ही गए होंगे कि हम क्यों कह रहे थे कि इस लकड़ी के फर्नीचर के दाम में आप बहुत कुछ खरीद सकते हैं. 

कहां पाई जाती है African Blackwood

जाहिर है कि यह इतनी मंहगी तो African Blackwood दुलर्भ भी होगी. मध्य और दक्षिण अफ्रीका के 26 देशों में यह पेड़ पाए जाते हैं. अमूमन इनकी ऊंचाई 25 से 40 फीट तक होती है. यह पेड़ ज्यादातर सूखे स्थानों पर पाए जाते हैं. 

कैसे दुर्लभ हो गई African Blackwood

इस पेड़ को तैयार होने में 50 से 60 साल का समय लगता है लेकिन तब इसे तस्करों से बचा पाना मुश्किल होता है. केन्या और तंजानियां जैसे देशों में इस पेड़ की लकड़ी का अवैध धंधा होता है, जिसकी वजह से यह इसे समय से पहले ही काट लेते हैं. जिसकी वजह से इन पेड़ों की संख्या भी तेजी से कम हो गई है. 

किस काम में इस्तेमाल होती है African Blackwood

लकड़ी के बारे में इतना कुछ जानने के बाद आपके अंदर यह उत्सुकता भी पैदा हो गई होगी कि आखिर इस African Blackwood के फर्नीचर दिखते कैसे हैं और इन्हें खरीदता कौन है. तो आपकों बता दें कि इतने महंगे फर्नीचर खरीदने वाले लोगों की संख्या बहुत कम है लिहाजा इस लकड़ी का ज्यादातर इस्तेमाल वाद्ययंत्र बनाने में किया जाता है. इस लकड़ी से बनी बांसुरी, शहनाई संगीतकारों की पहली पसंद होती है, इसके अलावा गिटार जैसे दूसरे वाद्ययंत्रों में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है.  

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