Amit Shah
क्रिकेट के मैदान में महेंद्र सिंह धोनी और सियासत की बिसात पर अमित शाह (Amit Shah) की रणनीति सबसे कारगर मानी गई है. जहां क्रिकेट के जानकार धोनी की हर विफलता के पीछे भी किसी प्रयोग की आशंका व्यक्त करते हैं ठीक उसी तरह राजनीति के विशेषज्ञ शाह के व्यवहार में आए बदलाव के पीछे सियासी मायने निकालने में जुटे हैं.

क्रिकेट के मैदान में महेंद्र सिंह धोनी और सियासत की बिसात पर अमित शाह (Amit Shah) की रणनीति सबसे कारगर मानी गई है. जहां क्रिकेट के जानकार धोनी की हर विफलता के पीछे भी किसी प्रयोग की आशंका व्यक्त करते हैं ठीक उसी तरह राजनीति के विशेषज्ञ शाह के व्यवहार में आए बदलाव के पीछे सियासी मायने निकालने में जुटे हैं. कोरोना को मात देने के बाद अमित शाह के बयानों में एक खास तरह की नरमीं देखने को मिली है. क्या इस नरमाहट के पीछे भविष्य की राजनीति के कोई संकेत छिपे हैं, जानने की कोशिश करते हैं.

नीतीश पर नर्म Amit Shah

अमित शाह के नरम रहने की वजह देखें तो उसका एक कारण यह दिख रहा है कि वह बिहार में बीजेपी की मौजूदगी को और मज़बूत करना चाहते हैं और जेडीयू तथा नीतीश कुमार के दबाव से हटना चाहते हैं लेकिन रिस्क नहीं लेना चाहते हैं. इसिलए अभी वह कह रहे हैं कि चुनाव का परिणाम जो कुछ भी हो अगर बीजेपी को भी सीटें ज्यादा मिलती हैं तो नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री बनेंगे. हाल ही में अमित शाह ने एक टीवी चैनल दिए इंटरव्यू में बिहार की राजनीति पर खुलकर चर्चा की. उन्होंने कहा कि ‘जो कोई भी भ्रांतियां फैलाने का प्रयास कर रहा है. मैं आज इस पर बड़ा फुल स्‍टॉप लगाना चाहता हूं. नीतीश कुमार ही बिहार के अगले मुख्‍यमंत्री होंगे. उन्होंने कहा कि नीतीश हमारे पुराने साथी हैं और गठबंधन तोड़ने का कोई कारण नहीं है.

Amit Shah का चिराग कनेक्शन

वहीं इन सबके इतर LJP के अध्यक्ष चिराग पासवान का अलग ही खेल चल रहा है जिसमें अमित शाह का ही फायदा दिख रहा है और शायद जो शाह चाहते हैं वहीं देखने को मिल रहा है. बिहार में NDA से अलग होने के बाद LJP ने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला लिया है. इसके मायनें ये निकाले जा रहे हैं कि यह रणनीति हो सकती है कि नीतीश के खिलाफ ज्यादा उम्मीदवार खड़ें होंगे तो चुनावों में उन्हें नुकसान मिल सकता है. चिराग पर बीजेपी के बड़े-बड़े नेताओं ने हाल ही में लगातार हमले किए जिससे नीतीश कुमार को यह भरोसा दिलाया जा रहा है कि वह चिराग के साथ नहीं मिले हुए, लेकिन जिस प्रकार के हमले अन्य बीजेपी नेताओं ने किए उस तरह को कोई सख्त बयान अमित शाह ने चिराग पासवान के खिलाफ नहीं बोला, और चिराग हर इंटरव्यू में ये बार-बार बोल चुके हैं कि नरेंद्र मोदी पर उन्हें पूरा भरोसा और मोदी उनके दिल में बसतें है जिस प्रकार श्री राम हनुमान के सीने में बसते थे. चिराग ये भी बोल रहे हैं कि बिहार का अगला नेता बीजेपी से ही होगा. इन सब बातों से यही देखने को मिलता है कि एक तरफ शाह, नीतीश को पूरा भरोसा दिला रहे हैं वहीं दूसरी तरफ चिराग भी पीछे हटने को तैयार है. इन सबका फायदा बीजेपी को ही मिलता दिखाई दे रहा है.

फर्जी TRP और सुशांत मामले पर Amit Shah

अगर पिछले कुछ महीनों के राष्ट्रीय मुद्दे देखें जाएं तो दिवंगत एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या का मामला अपने चरम पर था और बिहार में इसे पूरी तरीके से भावनात्मक मुद्दा भुनाने की कावयद में सभी राजनेता जुटे हुए थे. ये मामला पूरा महाराष्ट्र बनाम बिहार का कर दिया गया था जिसके बाद ड्रग का एंग्ल सामने आया और कई बडे़ एक्टर और एक्टर्स के नाम सामने आए और इसपर शाह ने CNN News 18 के इंटरव्यू में कहा कि “TRP के लिए बात को बढ़ाना उचित नहीं है, अगर कोई बात ढाकी जा रही है तो ज़रूर खबर हो लेकिन मीडिया ट्रायल नहीं होना. वहीं ड्रग के मामले में शाह ने कहा कि ड्रग के मुद्दे पर बॉलीवुड से जोड़ कर नहीं देखना चाहिए, NCB जांच कर रहा है सिर्फ TRP के लिए एक मुद्दे उठाना उचित नहीं है. यहां पर भी शाह ने बॉलीवुड पर नरमी दिखाई और TRP की बात कर न्यूज़ चैनलों को साधने की कोशिश की.

तनिष्क मामले पर Amit Shah

चुनाव के वक्त हिन्दू-मुसलमान यानी धर्म की राजनीति ना हो ऐसा क्या भला हो सकता है ? सोशल मीडिया पर तनिष्क (Tanishq) के विज्ञापन पर जो भारी विवाद देखने को मिला, जिसमें अलग-अलग मजहबों के बीच शादी से जुड़े इस विज्ञापन पर सवाल उठाए जा रहे थे. इसे लव जिहाद को बढ़ावा देने वाला बताया जा रहा था. जिसमें बीजेपी के कई नेता शामिल दिखे थे लेकिन इस विवाद पर अमित शाह ने अपनी राय रखी, जिसमें उन्होंने एक तरह से इन सब बातों को नकार दिया और एक बार फिर से नरम रुख अपनाते हुए कहा कि “सोशल हार्मोनी को छोटे मोटे हमले नहीं तोड़ सकते है, अंग्रेजो ने तोड़ने की कोशिश की, कांग्रेस ने भी की लेकिन सफल नहीं हुए, मेरा कहना है कि किसी भी प्रकार का ओवर एक्टिविज्म नहीं होना चाहिए.” शाह का ये बयान बताता है कि उन्होंने एक तरह से अपने ही कुनबे पर तंज कसा. वहीं हाल ही में राम मंदिर के बाद अब मथुरा मंदिर का मु्द्दे भी गर्माया है जिसके चलते कुछ संगठनों ने कोर्ट का रुख किया था. जिसके बाद राजनीति शुरू हो गई थी इसपर शाह ने कहा है कि इस पर हमारी पार्टी का कोई रोल नहीं हैं और इस पर वो कोई कमेंट नहीं करेंगे.

जानकारों का मानना है कि अमित शाह का यह रुख उनकी सियासी समझ का लंबे समय तक राजनीति में टिके रहने का परिचायक है. शाह जानते हैं कि किस मुद्दे पर किस तरह की प्रतिक्रिया देनी है. शाह का नया रुप बंगाल की राजनीति में उठे तूफान से पहले की खामोशी भी माना जा रहा है, उम्मीद है कि बंगाल के चुनावों में वह एक बार फिर अपने पुराने तेवरों में दिखाई देंगे.

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