Nitish Kumar
चुनाव की दहलीज पर खड़ा बिहार (Bihar) इन दिनों कई चुनौतियों का सामना कर रहा है, एक तरफ जहां कोरोना (Coronavirus) ने बिहार जड़ों को हिला कर रख दिया तो वहीं बची कसर बाढ़ (Flood in Bihar) ने पूरी कर दी.

Bihar Assembly Election 2020:

चुनाव की दहलीज पर खड़ा बिहार (Bihar) इन दिनों कई चुनौतियों का सामना कर रहा है, एक तरफ जहां कोरोना (Coronavirus) ने बिहार जड़ों को हिला कर रख दिया तो वहीं बची कसर बाढ़ (Flood in Bihar) ने पूरी कर दी. कोविड-19 के प्रकोप के चलते बड़े पैमाने पर प्रवासी मजूदर अपने घरों की तरफ वापस लौटे. कुछ प्रवासी अपनी जमा राशि लेकर वापस आए थे. कुछ महीनों तो गुजारा हो गया लेकिन अब हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं. युवाओं को तो कंपनियों में दोबारा बुलाया जा रहा है लेकिन 45 से 60 वर्ष की आयु वालों को कंपनियां बुलाने के लिए भी तैयार नहीं है. कंपनियों का कहना है कि इनके ऊपर कोरोना का खतरा ज्यादा है.

परेशानी सिर्फ बाहर बड़े शहरों में काम करने वाले लोगों के सामने नहीं खड़ी हुई है, बल्कि जो गांव में रहकर खेती के जरिए अपने परिवार का पालन पोषण कर रहे थे वो भी तमाम तरह की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं. क्योंकि पिछले दिनों बिहार में आई बाढ़ ने उनके खेत-खलिहान, जमीन-जायदात तक को नुकसान पहुंचाया है. अब बिहार अपने ईर्द-गिर्द होती चुनावी चहलकदमी को देखकर हैरान है. क्योंकि सरकार का दावा है कि केंद्र से मिले पैकेज के चलते बिहार विकास के रास्ते पर दौड़ रहा है. बिहार के लोगों में कंफ्यूजन है कि आखिर उस पैकेज की राशि से ऐसा कौन सा विकास हुआ, जिसके दम पर बीजेपी और जेडीयू, एक बार सत्ता हासिल करने के सपने देख रही है. Bihar Assembly Election 2020

Bihar Assembly Election 2020: Special Package Bihar

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 5 साल पहले पीएम मोदी (PM Modi) ने बिहार के लिए 1 लाख 25 हजार करोड़ के पैकेज की घोषणा की थी. नियम के अनुसार इस पैकेज के 65 हजार करोड़ राजमार्ग और ग्रामीण सड़कों पर खर्च किए जाने थे. लेकिन विभाग अनुसार 5 साल बाद अभी तक कई परियोजनाओं की शुरुआत तक नहीं हो सकी है. मीडिया में छपी रिपोर्ट के अनुसार बिहार सरकार में पथ निर्माण मंत्रालय ने बताया कि अपने हिस्से में आए पैकेज की राशि को 73 अलग-अलग योजनाओं के लिए बांट दिया गया था. जिनमें से 13 योजनाओं का काम पूरा हो चुका है जबकि 49 पर काम चल रहा है, बाकि बची योजनाएं अभी टेंडर स्टेज में हैं. यानि की इस विधानसभा में उनका काम पूरा होना संभव नहीं है.

इसी तरह पैकेज (Bihar Special Package) की राशि से करीब 3 हजार करोड़ से ज्यादा का धन कृषि क्षेत्र पर खर्च किया जाना था. किसानों के लिए मची अफरा-तफरी के बीच पीएम मोदी हर हफ्ते किसी न किसी परियोजना का शिलान्यास या उद्घाटन कर रहे हैं लेकिन वह इस पैकेज में किसानों के हिस्से में क्या आया, यह नहीं बता रहे हैं. इसी तरह भागलपुर में एक केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना होनी थी लेकिन इस साल की शुरुआत तक वहां सिर्फ स्थल का निरीक्षण ही हो पाया है. इस यूनिवर्सिटी के जरिए 1 लाख युवाओं को प्रशिक्षित करने का वादा किया गया था. इसके लिए 1550 करोड़ रुपये की राशि रखी गई थी.

बिहार की राजधानी पटना में गांधी सेतु पुल के समान्तर एक पुल का निर्माण किया जाना था. लेकिन वहां पुराने पुल के हिस्से की मरम्मत ही हो पाई है. राज्य सरकार ने इसके उद्घाटन के लिए प्रधानमंत्री को आमंत्रित किया है. पटना के स्थानीय लोग और पटना से बाहर जाने वाले इस पुल की महत्ता को बखूबी समझते हैं. नीतीश सरकार के लिए इन आंकड़ों में राहत कम और चिंता ज्यादा है. उसका कारण है कि क्योंकि आगामी समय में इन योजनाओं के लिए राशि का आवंटन इतना आसान नहीं होगा, क्योंकि केंद्र का खजाना खाली हो रहा है, राज्य की भी हालत अच्छी नहीं है. नीतीश सरकार को थी कि शराबबंदी के बाद राजस्व पर पड़ रहे अतिरिक्त भार को वह अन्य तरीकों से पूरा कर लेंगे लेकिन लॉकडाउन की भेंट चढ़ें महीनों से सब कुछ बिगाड़ कर रख दिया.

अब राष्ट्रीय जनता दल इसी पैकेज के आधार पर अपनी रणनीति तैयार कर रही है. उनका कहना है कि बिहार की जनता बार-बार बेवकूफ नहीं बनेगी, राज्य में इस बार महागठबंधन की सरकार बनेगी और विकास की धारा बहेगी.

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