Dog Saved British Soldier: हर दोस्ती के पीछे एक कहानी होती है. लेकिन आज जिस कहानी के बारे में आपको बताने जा रहे हैं वो बिल्कुल अलग है. यह दोस्ती इंसान की इंसान से नहीं बल्कि एक इंसान की एक जानवर से है. सीन लइडलो, पेशे से एक खनन विशेषज्ञ हैं और कुछ साल पहले उनकी तैनाती सीरिया में हुआ करती थी. सीरिया उन दिनों गृहयुद्ध जैसे हालातों से घिरा हुआ था. चारों तरफ गोलियों की तड़तड़ाहट और बम धमाकों के बीच सीन लइडलो काम तो करते थे लेकिन वह डिप्रेशन जैसी अवस्था में पहुंच गए थे. एक दिन जब वह अपने काम के सिलसिले में सीरिया में घूम रहे थे तो उन्हें एक डरा और सहमा हुआ कुत्ते का बच्चा मिला. 

धुओं के गुबार और धमाकों के कंपनों के बीच इस कुत्ते के बच्चे ने अपनी जान बचाने के लिए खुद तो एक पत्थर के पीछे छिपा रखा था और डर की वजह से कांप रहा था.  सीन लइडलो को एक अजीब सा अहसास हुआ और उसे वह अपने साथ अपने कैंप ले गए. कुत्ते का नाम रख दिया बैरी. कैंप में पहुंचते ही बैरी सबकी आंखों का तारा बन गया. हर कोई उसे अपने पास रखना चाहता. कुछ दिनों बाद लइडलो को इराक जाने के आदेश आ गए. सैनिकों के लिए एक मिशन को छोड़ दूसरे पर जाना आम होता है लेकिन इस बार लइडलो को सीरिया छोड़ने का मन नहीं कर रहा था, वह चाहते थे कि बैरी को वह अपने साथ इराक लेकर जाए. 

लाइडलो ने अपने अधिकारियों ने परमिशन ली और एक संगठन की मदद से बैरी को अपने साथ इराक भी ले गए. इसके बाद बैरी ने लाइडलो के साथ 5 देश, दो वॉर जोन और हजारों मीलों का सफर साथ किया. लाइडलो कहते हैं कि बैरी ने बेशक उनकी जान बचाई लेकिन बैरी ने उन्हें युद्ध के अवसाद से बाहर आने में मदद की. वह कहते हैं कि अगर उनकी जिंदगी में बैरी नहीं आता तो शायद वह आत्महत्या जैसा कदम उठा लेते.   

सीन अब रिटायर हो चुके हैं और लंदन के अपने घर पर बैरी के साथ रहते हैं. उनका कहना है कि अब वह बैरी के बिना अपनी जिंदगी की कल्पना भी नहीं कर सकते हैं.

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