Congress in Bihar

Congress in Bihar: बिहार तमाम चुनौतियों के बीच चुनावों (Bihar Assembly Election 2020) की तैयारियों में जुटा हुआ है. एक तरफ नीतीश कुमार (Nitish Kumar) अपनी नाकामियों को छिपाने और जनता की नाराजगी को टटोलने की कोशिश कर रहें हैं तो दूसरी तरफ तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) पूरी ताकत के साथ अपनी मौजूदगी को दर्ज करा रहे हैं. इन सबके बीच कांग्रेस एक बार फिर बिहार से ‘लापता’ सी प्रतीत हो रही है. अंतकर्लह और भीतरघात जैसे पड़ाव से गुजर रही कांग्रेस की बिहार टीम में भी बगावत के सुर बुलंद होते दिखाई दे रही है. बिहार कांग्रेस में पिछड़ों की उपेक्षा को लेकर खीचमतान का दौर शुरू हो गया है. कांग्रेस के ही नेता उस पर पिछड़ों वर्ग की उपेक्षा का आरोप खुलकर लगा रहे हैं, जिसका परिणाम ये हुआ है कि बिहार में विधानसभा चुनाव (Bihar Election 2020) से पहले कांग्रेस खुद ही बैकफुट हाशिये पर नजर आने लगी.

क्यों कांग्रेस के नेता बागी तेवर अपना रहे हैं? / Congress in Bihar

जुलाई में कांग्रेस की बिहार (Congress in Bihar) प्रदेश चुनाव समिति की बैठक हुई, यहां जब पिछड़ों की अनदेखी का मुद्दा उठा तो कुछ नेताओं को बोलने नहीं दिया गया. इसके बाद कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य और पूर्व उपाध्यक्ष ने कांग्रेस के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया. उनकी मांग है कि चुनाव से पहले कांग्रेस को RJD से गठबंधन तोड़ना होगा. कैलाश पाल का कहना है आज अगर कांग्रेस हाशिये पर है तो इसका सबसे बड़ा कारण है कि पिछड़े और अति पिछड़े वर्ग की उपेक्षा. उन्होंने कांग्रेस आलाकमान से अपील की है चुनाव से पहले आरजेडी से गठबंधन खत्म करना चाहिए. उन्होंने याद दिलाया कि बिहार में मुस्लिम-यादव मतदाताओं की मदद से ही लालू परिवार ने बिहार की सत्ता पर 15 साल तक राज किया.

मंत्री पद से लेकर अध्यक्ष कोटे तक/ Congress in Bihar

कैलाश पाल ने पिछड़ों का मुद्दा उठाते हुए साल 2015 के चुनावों का हवाला दिया. इस चुनाव में नीतीश कुमार की अगुवाई में जेडीयू, आरजेडी और कांग्रेस ने मिलकर चुनाव लड़ा था. कांग्रेस के हिस्से में यहां चार मंत्री पद आए थे. पाल कहते हैं कि इन चार में कांग्रेस ने दो पद उच्च जाति से आने वाले नेताओं को दे दिए, एक पद दलित को तथा एक पद अल्पसंख्यक की झोली में डाल दिया. इसके बाद उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के फार्मूले को भी बताया. बकौल पाल, बिहार में चार कार्यकारी अध्य़क्ष बनाए गए तो दो पद उच्च जाति वाले नेताओं को दिए गए. एक पद दलित नेता और एक पद अल्पसंख्यक को दे दिया गया.

RJD से दूरी क्यों / Congress in Bihar

कांग्रेस के नेताओं का मानना है कि अगर कांग्रेस उच्च जाति के मतदाताओं को भाजपा के हिस्से से निकालकर अपने पाले में करना चाहती है तो उसे RJD से सपर्क तोड़ना पड़ेगा. क्योंकि सब जानते हैं कि बिहार में उच्च जाति के मतदाता RJD के साथ कभी नहीं होंगे.

क्या कहते हैं समीकरण/ Congress in Bihar

बिहार में पिछड़ा वर्ग चुनाव के लिहाज से एक अहम फैक्टर है, आरजेडी और जेडीयू के फार्मूले पर इसे आसानी से समझा जा सकता है. उच्च जाति के लोगों को भारतीय जनता पार्टी का लॉयल वोटर माना जाता है. कांग्रेस के सूत्रों के अनुसार पार्टी में पिछड़ों की आबादी 50 फीसदी से ज्यादा है. लेकिन कांग्रेस लगातार इनकी अनदेखी कर रही है. पिछले चुनावों में कांग्रेस ने पिछड़े वर्ग के नेताओं के टिकट बेमुरव्वत काटे थे. साल 2015 में कांग्रेस ने मात्र 41 सीटों पर चुनाव लड़ा था लेकिन सिर्फ 11 से 12 फीसदी पिछड़ों को ही टिकट दिया गया था. हालांकि कांग्रेस पिछड़े वर्ग की अनदेखी के दावे को खारिज करती है लेकिन पार्टी के भीतर की आवाज बाहर आकर काफी कुछ संकेत दे रही है.

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