Divyang Raju

Divyang Raju: कोरोना के खिलाफ पूरा विश्व युद्ध लड़ रहा है, वक्त बीतने के साथ यह महामारी तेजी से अपने पैर पसार रही है. संकट के इस दौर मदद के लिए बढ़ने वालों हाथों की संख्या भी कम नहीं है. हर कोई अपने सामर्थ्य के हिसाब से जरूरतमंदों की मदद कर रहा हैं. ऐसे में एक भिखारी का नाम इन दिनों चर्चा में है. आम दिनों में लोगों से मांग कर अपना जीवन बसर करने वाले इस भिखारी ने संकट के इस दौर में जो किया वो वाकई काबिल-ए-तारीफ है. यहां तक पीएम मोदी भी इनकी तारीफ कर चुके हैं. तो चलिए जान लेते हैं इनके बारे में और यह भी बताते हैं कि क्यों पीएम मोदी ने इनकी तारीफ सार्जनिक तौर पर की. 

जानिए इनके बारे में (Divyang Raju)

इनका नाम (Divyang Raju) है, राजू. वैसे तो राजू दिव्यांग हैं लेकिन इनके हौसले के आगे बड़ों-बड़ों की शारीरिक दक्षता कम मालूम पड़ती है. राजू, पंजाब के पठानकोट की सड़कों पर मिल जाएंगे. कभी दिव्यांग वाहन पर तो कभी सड़क पर घसीटते हुए. जिस शहर ने उनको अब तक आसरा दिया, संकट के इस दौर में  वह इसी शहर की मदद कर रहे हैं. राजू दिन भर लोगों से पैसे मांगते हैं और जो पैसे इकट्ठे होते हैं उससे गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करते हैं. कोरोना संकट के दौर में वह अपने इकट्ठे किए हुए रुपयों से गरीबों और जरूरतमंदों के घरों तक राशन पहुंचाते हैं, अगर कोई बिना मास्क के सड़क पर दिख जाए तो उसे मास्क देते हैं. 

पीएम मोदी ने किया जिक्र 

वैसे तो राजू (Divyang Raju) को पठानकोट में हर कोई जानता है. लेकिन पीएम मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में उनके हौसले की तारीफ कर, उन्हें अब और भी बड़ा स्टार बना दिया है.  राजू के व्यवहार को देखते हुए राजू को दान देने से पहले लोग सोचते नहीं. पुराने कपड़े, खाने-पीने का सामान राजू तक पहुंचता रहता है लेकिन जब कोराना का दौर आया तो लोगों ने राजू से भी दूरी बना ली. राजू ने इस संकट की गंभीरता को समझा और उन लोगों को मदद करने के लिए निकल पड़े जो बेसहारा थे. उन्होंने अपनी बचत से राशन खरीदा और लोगों के घरों तक पहुंचाना शुरू किया. पठानकोट में राजू ने 100 परिवारों को एक-एक महीने का राशन दिया. इसके अलावा वो अपने साथ खाना लेकर सड़कों पर निकला करते थे और भूखे और गरीब लोगों का पेट भरा करते थे. लेकिन राजू को लगा कि वह अकेले सब तक नहीं पहुंच सकते, लिहाजा जगह-जगह भंडारे का आयोजन करवाना शुरू किया. 

नेकी के काम पहले भी किए 

ऐसा नहीं है कि राजू (Divyang Raju) ने सिर्फ कोरोना के संकट में पठानकोट के लोगों की मदद की है, राजू पहले भी ऐसा कर चुके हैं. वह कई कन्या विवाहों का आयोजन करवा चुके हैं. हर साल कई महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सिलाई मशीन दान करते हैं, कई बच्चों की पढ़ाई का जिम्मा भी उठाया हुआ है. इलाके के लोग जानते हैं कि वह पैसों का दुरुपयोग नहीं करते हैं इसलिए उन्हें दिल खोलकर दान भी किया जाता है. 

Divyang Raju का कहना है कि बचपन में उनको दिव्यांग जानकर अकेला सड़कों पर छोड़ दिया गया था, आज वो अपने नेक काम करके पूरे शहर को अपना परिवार बना चुके हैं. उनका विश्वास है कि नेक कामों की बदौलत उन्हे मौत के बाद कंधों की कमी महसूस नहीं होगी. 

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