Durabh Rawat Barosi
Durabh Rawat: 12 साल नौकरी करने के बाद Startup का फैसला लिया

Durabh Rawat: कहते है कि जो इंसान बड़े सपने देखने की इच्छा अपने मन में रखता है वो उसको पूरा करने के लिए कोई न कोई राह तो जरूर निकाल लेता है. ऐसी ही एक कहानी इस वक्त उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर से सामने आई है, जहां के रहने वाले दुर्लभ रावत (Durlabh Rawat) बेहद ही खुद्दार और शानदार इंसान है. एक कंपनी में मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा करने के बाद दुर्लभ की नौकरी लग गई. वहां, उन्हें पैकेज अच्छा मिल रहा था. कम से कम 12 साल तक उन्होंने उस सेक्टर को अपने दिए. इसके बाद उन्होंने अपना खुद का कुछ करने की ठानी. ऐसा करने के पीछे एक वजह थी कि वो ऐसा काम करना चाहते थे जिसमें वो खुद फैसला ले सकें. इसी के चलते 2016 में उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी और एक डेयरी फार्म का काम शुरू कर दिया. अब वो अपने दूध, दही, घी से लेकर कई प्रोडक्ट की मार्केटिंग करने का काम करते हैं। एक किचन में उनकी जरूरत होती है. आपको ये जानकार हैरानी होगी कि उनके 7 हजार से अधिक ग्राहक है और उनका पिछले साल का टर्नओवर 2.5 करोड़ रूपए हैं. चलिए एक नजर डालते हैं दुर्लभ की कहानी पर.

दुलर्भ (Durlabh Rawat) ने 12वीं तक पढ़ाई अपने गांव में की है, उनके पिता एक किसाने थे. वह इसीलिए बचपन से ही खेती से जुड़े हुए थे. दैनिक भास्कर में छपी रिपोर्ट के अनुसार, दुर्लभ बताते हैं कि जब वो नौकरी छोड़कर गांव आए थे तो उन्होंने ये तय नहीं था कि क्या काम करना है? लेकिन इतना तो पक्का था कि वो खेती से जुड़ा कुछ काम करेंगे. उन्होंने बताया कि मेरे एरिया में कई लोग दूध का व्यापार करते थे. इसमें बहुत कम लोग ही क्वालिटी को लेकर ध्यान देते थे. ऐसे में लगा कि यहीं बिजनेस करना सही होगा। इसमें से एक फायदा ये भी होता है कि तुरंत ही पैसा मिल जाता है.

50 पशुओं के साथ उन्होंने दूध का काम करना शुरु कर दिया. वे पास की ही एक डेयरी में दूध को सप्लाई करने का काम करते थे. उन्होंने 6 महीने तक ऐसा ही काम किया. इससे पहले उन्हें ज्यादा कुछ हासिल नहीं हुआ। फिर एक जानकर ने उन्हें ये सुझाव दिा कि वो अपना खुद का कोई ब्रांड तैयार कर लें. इसके बाद 2016 में उन्होंने Barosi नाम से अपना एक स्टार्टअप लॉन्च किया था. वह बॉटल में दूध को सप्लाई करके घरों में सप्लाई किया करते. उनका ये आइडिया सफल भी रहा और उनके काफी ज्यादा कस्टर्म तैयार हो गए.

वहीं कई लोगों ने आगे उन्हें ये सुझाव दिया कि वो अपने दूसरे प्रोडक्ट को भी लॉन्च करें. इसके बाद उन्होंने अपने गांव के एक किसान के साथ गुड़ के लिए टाईअप किया. इसके बाद घी और शहद को भी बेचना शुरु कर दिया. उनका काम धीरे-धीरे बढ़ता चला गया और 15 किसानों का उनका अब नेटवर्क है. उन किसानों की भी अच्छी कमाई होती है. दुर्लभ की टीम के अंदर 55 लोग काम किया करते हैं. उनमें से 35 लोग सिर्फ डिलीवरी के लिए हैं. एक एजेंसी उन्होंने हायर की है जो उन्हें टेक्निकली सर्पोट करती है.

दुर्लभ करीब 1800 घरों में दूध की सप्लाई करते हैं. आपको ये जानकार भी हैरानी होगी कि वॉट्सऐप ग्रुप के साथ मिलकर एक ऐप भी उन्होंने लॉन्च किया है. उसमें ग्राहक अपनी जरूरत के हिसाब से ये बाते हैं कि उन्हें कितना सामान चाहिए. इसके बाद डिलीवरी करने वाली टीम को एक लिस्ट दी जाती है कि किसे कितना दूध और कौन सा सामान चाहिएय. ग्राहक के अकाउंट के हिसाब से पैसे कट जाते हैं. जिसे दूध नहीं लेना वो 10 बजे से पहले इस बात की जानकारी दे देता है. सभी प्रोडक्ट्स की पैकिंग इको फ्रेंडली होती है. जैसे आटा औऱ बाकी चीजें जूट के बैग में पैक करते हैं. दूध और लिक्विड चीजें कांच या फिर स्टील की बॉटल में सप्लाई करते हैं. दुर्लभ ने बताया कि आज हमारे 7 हजार से अधिक ग्राहक है. दिल्ली के अलावा नोएडा, मुंबई के अलावा कई बड़े शहरों से भी वो ऑर्डर पाते हैं.

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