Germany World War
Germany World War

प्रथम विश्व युद्ध (First World War) में हारने के बाद जर्मनी (Germany) को आत्मसमर्पण करने के लिए विवश किया गया. इस हार ने जर्मनी (Germany) को बुरी तरह से तोड़कर रख दिया. पूरे देश को अभावों और अव्यवस्थाओं का सामना करना पड़ा. जर्मनी की जनता को वर्साय की संधि (Treaty of Versailles) जैसा अपमान का घूंट पीना पड़ा. यहीं नहीं जर्मनी को युद्ध का अपराधी मानने के साथ-साथ उसे राष्ट्र संघ की सदस्यता भी नहीं दी हई. उसे आर्थिक रूप से पंगु करने के लिए 269 अरब गोल्ड मार्क (तत्कालीन जर्मन करंसी) का जुर्माना लगाया गया जोकि करीब एक लाख टन सोने की कीमत के बराबर था. हांलाकि इसमें बाद में कई बार बदलाव किया गया लेकिन फिर भी यह इतनी बड़ी कीमत थी कि इसे चुकाने में जर्मनी (Germany ) को 91 साल का समय लगा था.

Germany पर क्यों लगाया गया जुर्माना

दरअसल युद्ध में विजयी हुए देशों ने जर्मनी को पहले विश्व युद्ध का जिम्मेदार माना था. विजय मित्र राष्ट्रों में अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, इटली व अन्य देश शामिल थे. ये सभी देश चाहते थे कि जर्मनी इतना कमजोर हो जाए कि भविष्य में दोबारा ऐसी नौबत न पैदा हो, लेकिन मित्र देशों की यह सोच गलत साबित हुई, और इसी संधि के प्रावधानों के कारण ही दूसरा विश्व युद्ध छिड़ा.

Germany: वर्साय की संधि और नाजी क्रांति

जर्मनी के ऊपर थोपी गई वर्साय की संधि का विरोध स्वभाविक था. इसी प्रतिक्रिया के परिणामस्वरुप जर्मनी में हिटलर की अगुवाई में नाजी क्रांति हुई. इस क्रांति का उद्देश्य जर्मनी को अपमानपूर्ण परिस्थितियों से बाहर निकलकर एक महाशक्ति के रुप में स्थापित करना था.

Germany को 9 दशक से भी ज्यादा समय लगा


वर्साय की संधि के तहत जर्मनी पर लगे आर्थिक दंड की राशि को खत्म होने में 9 दशकों से भी ज्यादा का वक्त लगा. नवंबर 1918 को युद्ध विराम का ऐलान हुआ था. इसके बाद 5 महीनों तक लंबा विमर्श के बाद 17 जून 1919 को जर्मनी को इस संधि के बारे में बताया गया और नहीं मानने पर युद्ध की चेतावनी भी दी गई. इसके बाद 28 जून 1919 को इस संधि पर जर्मन के नेताओं के हस्ताक्षर हुए और 2 अक्टूबर 2010 की इस संधि की आखिरी किश्त को चुकाया गया.

हिटलर ने Germany पर लगे जुर्माने को चुकाने से इनकार किया


संधि के तहत जर्मनी पर सबसे पहले 269 अरब गोल्ड मार्क (तत्कालीन जर्मन करंसी) का जुर्माना लगा था. 10 साल बाद 1929 में इसे घटाकर 112 अरब गोल्ड मार्क कर दिया गया. 1931 में जब वैश्विक आर्थिक संकट आया तो जर्मनी को इसकी सालाना किश्त चुकाने में राहत भी दी गई. और 1933 में हिटलर के हाथ में सत्ता आई तो उसने इस संधि के तहत लगने वाले जुर्माने को चुकाने से इनकार कर दिया.

Germany: 20 साल फिर हुआ समझौता


इसके 20 साल बाद बकाया राशि के भुगतान के लिए लंदन में एक नया समझौता किया गया. इस समझौते के तहत पूर्वी और पश्चिमी जर्मनी के एक होने के कारण कई भुगतानों को निलंबित कर दिया गया. 1990 में जब जर्मनी दोबारा एक हुआ तो बकाया राशि का भुगतान शुरू हुआ, इस समय भी जुर्माने की राशि में खासी रियायत दी गई थी.

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