Independence Day 2020 Dhyan Chand

Independence Day 2020: क्या आपको पता है भारत ने आजादी हासिल करने के 11 साल पहले 15 August के दिन ही विश्व पटल पर भारतीय परचम लहराने का मौका दिया था. इस गौरावान्वित पल का मौका हमें दिया था हॉकी के जादूगर के नाम से मशहूर Dhyan Chand ने, जिनकी अगुवाई में भारतीय टीम ने आजादी से 11 साल पहले बर्लिन ओलंपिक में जर्मनी को हराकर भारतीय झोली में गोल्ड मेडल डाल दिया था. इसी मैच में ध्यानचंद के हॉकी के जादू को देखने के बाद हिटलर इतना प्रभावित हुआ था कि उसने मेजर ध्यानचंद को जर्मन नागरिकता तक का प्रस्ताव दे दिया था. 15 अगस्त के मौके पर जब हम अपने स्वतंत्रता सेनियाओं के बलिदान को याद करते हैं, उनकी शहादत को सलाम करते हैं तो क्यों न, इस मौके पर ध्यानचंद जैसे दिग्गज खिलाड़ी के भी योगदान को याद किया जाना चाहिए जिसने विपरित परिस्थितियों में भारतीयों को इस गौरवमयी पल को जीने का मौका दिया था.

Dhyan Chand का पसंदीदा पल/ Independence Day 2020

ध्यानचंद के बेटे अशोक ध्यानचंद भी हॉकी के दिग्गज खिलाड़ियों में गिने जाते हैं, 1975 विश्वकप में भारत की खिताबी जीत के हीरों में उनकी गिनती होती है. इस मौके पर उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि Dhyan Chand की यादों में ओलंपिक का वह मैच हमेशा जिंदा रहा, वो जब भी हॉकी की अच्छी यादों की बातें किया करते थे तो एक बार ओलंपिक के उस फाइनल मैच का जिक्र जरूर करते थे.

फ्रांल को 10-0 से हराया / Independence Day 2020

उन्होंने बताया कि समुद्री रास्ते से भारत की हॉकी टीम हंगरी के खिलाफ अपने पहले मैच से करीब दो हफ्ते पहले बर्लिन पहुंची थी और पहुंचते ही जर्मन के साथ अपने पहले प्रैक्टिस मैच में 4-1 से हार गई थी. लेकिन इसके बाद भारतीय टीम ने कई उलटफेर करते हुए अपनी जगह सेमीफाइनल में बना ली. सेमीफाइनल में भारत का खेल देखकर पूरा विश्व दंग रह गया, क्योंकि इस मैच में फ्रांस को 10-0 से जोरदार मात दी. मेजर ध्यानचंद मे इस मैच में चार गोल अकेले दाग डाले.

फाइनल में नंगे पैर खेले/ / Independence Day 2020

सेमीफाइनल में ध्यानचंद का खेल देखने के बाद जर्मनी की पूरी टीम उनके खिलाफ लग गई. जर्मन के सभी डिफेंडर ध्यानचंद को घेरने की नाकाम कोशिश करते रहे, हालांकि इस दौरान उनका दांत भी टूट गया लेकिन उन्हें इससे कोई खास फर्क नहीं पड़ा. अशोक कुमार बताते हैं कि फाइनल के बाद ध्यानचंद और उनके भाई रूप सिंह ने अपने जूते उतार दिए और नंगे पैर खेलते हुए जर्मनी को 8-1 से धूल चटाई. इस मैच में ध्यानचंद ने तीन और रूप सिंह ने दो गोल दागे थे.

जीतने के बाद भी उदास थे ध्यानचंद / Independence Day 2020

अशोक कुमार ने समाचार एजेंसी भाषा से बातचीत में बताया कि उस ऐतिहासिक मैच के पहले ध्यानचंद ने खिलाड़ियों को तिरंगे की शपथ दिलाई थी कि कुछ भी हो जाए, हर हाल में फानइल का खिताब जीतना है. चूंकि उस वक्त भारत ब्रिटिश झंडे के तले खेल रहा था इसलिए हमारे तिरंगे में एक चरखा भी हुआ करता था. जब भारत ने इस मैच में जीत दर्ज की तो सभी भारतीय जश्न मना रहे थे लेकिन ध्यानचंद एक किनारे उदास बैठे थे. उनके साथियों ने पूछा कि जीत के बाद भी उदास क्यों हो, तो ध्यानचंद ने जवाब दिया था काश हम यूनियन जैक के बजाय अपने तिरंगे तले होते…

Independence Day 2020 Dhyan Chand

अशोक कुमार बताते हैं कि यह उनका आखिरी ओलंपिक था. हॉकी स्टिक के जादूगर कहे जाने वाले ध्यानचंद ने 15 अगस्त 1936 को हम भारतीयों को एक संकेत दिया था. कि आने वाले कुछ सालों बाद इस तारीख का जश्न को मनाया जाएगा लेकिन उस वक्त जीत हिंदुस्तान की होगी और बात तिरंगे के आन-बान और शान की होगी.

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