Justice For Sushant Sushant Singh Rajput

Justice For Sushant: सुशांत सिंह राजपूत की मौत (Sushant Singh Death Case) का मामला CBI को देने के बाद ‘जस्टिस फॉर सुशांत’ की गुहार लग रही है. ट्विटर का ट्रेंड #Justice4Sushant संकेत दे रहा है बिहार की मौजूदा सियासी और सामाजिक परिस्थिति में इसके क्या मायने हैं. उत्तर प्रदेश और बिहार की राजनीति में जाति एक अहम फैक्टर माना जाता है. अब अगर इस मामले को भी इसी ‘सियासी चश्मे’ से देखें तो शायद आप स्थिति को समझ पाएं. दरअसल सुशांत सिंह ‘राजपूत’ जाति से ताल्लुक रखते हैं. बिहार में इस वर्ग की आबादी महज 4 फीसदी है लेकिन बिहार में इस वर्ग का दबदबा अन्य जातियों पर भी रहता है. बिहार के ग्रामीण इलाकों में आज भी राजपूत अहम फैसले लेते हैं और बाकि के वर्ग उसे आसानी से स्वीकार भी कर लेते हैं. ऐसे में जब बिहार ‘बाढ़ के बहाव’ में बह रहा है, ‘कोरोना’ जैसी ‘महामारी’ से ‘जूझ’ रहा है तो सत्ताधारी दल से लेकर विपक्ष तक सुशांत को इंसाफ दिलाने का दावा कर रहे हैं.

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सुशांत पर सतर्क नीतीश /Justice For Sushant
नीतीश कुमार पर आरोप लगते रहे कि महामारी के दौरान वह सिर्फ सीएम दफ्तर के अंदर से फैसले लेते रहे, बाढ़ के हालातों में नीतीश कुमार ने हवाई दौरा तक नहीं किया. इस वजह से भी उनको खासी आलोचनाओं का शिकार होना पड़ा. लेकिन सुशांत के मामले पर वह सतर्क नजर आ रहे हैं. अपने किसी प्रतिनिधि को भेजने के बजाय वह खुद सुशांत सिंह राजपूत के दरवाजे तक पहुंचे. सिर्फ नीतीश ही नहीं बल्कि आरजेडी प्रमुख तेजस्वी यादव और चिराग पासवान भी सुशांत के परिवार से मुलाकात करने के लिए पहुंचे. लिहाजा इसका विश्लेषण करना अहम हो जाता है कि क्यों बिहार की राजनीति में सुशांत सभी मुद्दों से अलग सियासत के केंद्र बिंदु बन गए हैं.

राजनीतिक दलों के जनता के लिए संदेश /Justice For Sushant
इस मामले के साथ सभी पार्टियां जनता के दिल तक दो संदेश भेजना चाहती हैं. पहला यह कि ‘बिहारी अस्मिता’ के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया और दूसरा यह कि हम ‘राजपूतों के साथ’ खड़े है.

राजपूतों की ताकत /Justice For Sushant
अब अगर आप बिहार में राजपूतों की ताकत का आंकलन करना चाहते हैं तो 2015 के चुनावों पर एक नजर डालें. साल 2015 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने 65 उच्च जाति के उम्मीदवारों को उतारा था. जिनमें से 30 राजपूत थे यानी की करीब 50 फीसदी. वहीं कांग्रेस, आरजेडी और जेडीयू के महागठबंधन ने 39 उच्च जाति के उम्मीदवारों को टिकट दिया था. जिनमें से 12 राजपूत थे. बिहार की राजनीतिक रंगभूमि में सुशांत ही राजपूतों का सबसे बड़ा चेहरा हैं और उनके साथ लोग भावनात्मक रुप से भी जुड़े हैं.

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मामले की CBI जांच/ Justice For Sushant
अब सुशांत का मामला सीबीआई के हाथों में है. अगर सीबीआई बिहार चुनावों से पहले इस हत्याकांड की परतें खोलकर जनता के सामने रखने में कामयाब हो जाती है तो जाहिर है कि इसका सियासी मुनाफा भुनाने में बीजेपी कोई कोर कसर नहीं छोड़ेगी और अगर इस जांच को रोकने की कोशिश की गई तो भी पत्ते बीजेपी के हाथ में आ जाऐंगे. ऐसे में बिहार के आने वाले चुनावों अगर बीजेपी गठबंधन की ड्राइवर सीट पर बैठी नजर आए तो हैरान होने वाली कोई बात नहीं होगी.

सुशांत सिंह राजपूत की असमय मौत से लाखों लोग सदमें में हैं. इसकी जांच होना और दोषियों को सजा होना उतना ही जरूरी है, जितना जरूरी बाढ़ पीड़ितों को राहत मिलना और कोरोना मरीजों का इलाज होना है. कहीं वोट की राजनीति में बिहार का वोटर एक बार फिर ठगा सा न रह जाए.

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