Kargil Diwas 2020

Kargil Vijay Diwas 2020: साल 1999 में आज ही के दिन (26 जुलाई) हमारे भारतीय सेना ने पाकिस्तानी फ़ौज द्वारा क़ब्ज़े मे ली गयी सारी भारतीय चौकियों को छुड़ा लिया था. इस ऑपरेशन को थल सेना द्वारा ‘ऑपरेशन विजय’ और वायु सेना द्वारा ‘आपरेशन सफ़ेद सागर’ का नाम दिया गया. कारगिल युद्ध वर्ष 1999 मई महीने से प्रारम्भ हो कर जुलाई माह के अंत तक चला था. विदित हो कारगिल का इलाक़ा जम्मू कश्मीर के उत्तरी भाग मे स्थित है यह प्रथम कश्मीर युद्ध (1947-48)की लड़ाई मे बंटा और तभी से LOC को ही सीमा मान लिया गया.

युद्ध के कारण/Kargil Vijay Diwas 2020

युद्ध के मूल कारणो की बात करें तो LOC के पास के इलाक़े को सर्दियों के मौसम की शुरुआत मे दोनो पक्षों द्वारा ख़ाली कर दिया जाता है. गर्मियों मे मई के महीने तक दोनो सेनाएं अपनी-अपनी चौकियों पर फिर से क़ाबिज़ हो जाती हैं. लेकिन इस साल 1999 में पाकिस्तानी फ़ौजियों ने मार्च-अप्रैल तक अपनी चौकियों के साथ साथ भारतीय चौकियों पर भी अपना क़ब्ज़ा जमा लिया. जिसकी जानकारी वहां के स्थानीय चरवाहों द्वारा दी गयी. पेट्रोलिंग के माध्यम से इस घटना की पुष्टि भी कर ली गई थी.

क्या थी पाकिस्तान की साजिश /Kargil Vijay Diwas 2020

पाकिस्तानी फ़ौज द्वारा भारतीय चौकियों पर क़ब्ज़ा कर लेने से भारत को बहुत बड़ा नुक़सान झेलना पड़ सकता था, क्योंकि राष्ट्रीय राजमार्ग 1D जोकि श्रीनगर को लेह से जोड़ने की एकमात्र सड़क है. वो LOC के बिल्कुल नज़दीक से हो कर गुजरती है और इन भारतीय चौकियों पर क़ाबिज़ होकर पाकिस्तान राजमार्ग को बाधित कर आसानी से भारत से लेह के सम्पर्क को तोड़ सकता था. महत्वपूर्ण है कि लेह द्वारा ही सियाचिन को सेना शस्त्र व रसद इत्यादि की आपूर्ति की जाती है. इस मार्ग को अवरुद्ध कर पाकिस्तान भारत को कश्मीर विवाद के निपटारे हेतु टेबल वार्ता पर विवश करना चाहता था. 21 मई को भारतीय सेना ने इस आपरेशन की शुरुआत की. भारतीय एयर फ़ोर्स ने उनकी चौकियों पर हवाई हमले करने प्रारम्भ किए. लगभग 40 दिन के भीतर हमने अपने अपनी चौकियों को वापिस हासिल कर लिया.

जवानों के लिए मुश्किल हालात/Kargil Vijay Diwas 2020

इन चौकियों को हासिल करने के लिए भारतीय फ़ौज को भीषण लड़ाई लड़नी पड़ी क्योंकि गर्मियों में भी रात के समय वहां तापमान -10 के क़रीब पहुंच जाता था. चूंकि दुश्मन पहाड़ियों के ऊपर थे और इसी कारण भारतीय सेना दिन मे युद्ध नही कर सकती थी क्योंकि दिन के समय दुश्मन इन्हें आसनी से देख सकते थे. 4 जुलाई को भारतीय सेना ने टाइगर हिल पर क़ब्ज़ा कर अपना परचम लहरा दिया. टाइगर हिल पर क़ब्ज़ा इसलिए भी बहुत महत्वपूर्ण था क्योंकि वहां दुश्मन का क़ब्ज़ा रहने से वे सरलता पूर्वक बड़ी आर्टिलरी गन के मध्यम से कारगिल टाउन, जहां सेना की काफ़ी बड़ी संख्या में मौजूदगी थीं उसे सीधा निशाना बना सकते थे.

पाकिस्तान ने टेके घुटने/Kargil Vijay Diwas 2020

तत्कालीन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ जिन्होंने लगभग महीने भर उस फ़ौज को अपनी फ़ौज माना ही नही था व उन्हें कश्मीरी फ़्रीडम फ़ाइटर ही कहते आ रहे थे, ने इस संबंध मे अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन से सहायता मांगी परंतु अमेरिका ने मदद से साफ़ इंकार किया और साथ ही साथ उन्हें अपनी सेना हटाने की नसीहत दे दी. अमेरिकी दबाव के कारण 4 जुलाई को नवाज़ शरीफ़ ने अपनी सेना को हटाने का आदेश दिया व धीरे धीरे 10 से 15 दिन मे उनकी सेना पीछे हट गयी. हालांकि भारतीय सेना ने उन्हें पहले ही मुख्य चौकियों से बाहर खदेड़ दिया था.

जवानों को सम्मान/Kargil Vijay Diwas 2020

26 जुलाई को Kargil Vijay Diwas मनाया जाता है क्योंकि मुख्य लड़ाई का अंत उसी दिन हुआ और इस दिन तक भारत ने अपनी सारी चौकियों पर पुनः क़ब्ज़ा हासिल कर लिया. कारगिल के युद्ध मे अपना शौर्य प्रदर्शन करने के लिए मनोज कुमार पाण्डेय, विक्रम बत्रा, योगेंदर सिंह यादव और संजय कुमार को परमवीर चक्र से नवाज़ा गया था.

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