George Floyd
Killing of George Floyd

Killing of George Floyd: पूरा विश्व कोरोना के साथ जंग लड़ रहा है. अमेरिका में यह चुनौती उस वक्त दोहरी हो गई जब एक अश्वेत शख्स की मौत के बाद पूरा देश सड़कों पर उतर आया. कोरोना जैसे खतरनाक हालातों के बीच अमेरिका में अब तक का सबसे बड़ा प्रदर्शन हुआ. मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि इस मौत से अमेरिका की जनता का आक्रोश सीमाओं को तोड़ बैठा, 40 से ज्यादा शहरों में हिंसक प्रदर्शन हुए, विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कोरोना के हालात नहीं होते तो यह प्रदर्शन ट्रंप के कार्यकाल का वो बदनुमा दाग बन जाता है, जिसको हटाने की कोशिश में वह आगामी राष्ट्रपति चुनाव हार जाते. हालांकि इससे उनकी छवि को खासा नुकसान हुआ है और इसका असर चुनाव के नतीजों पर भी दिख सकता है. जॉर्ज फ्लॉयड का शव ह्यूस्टन में दफनाया गया, उनकी अंतिम यात्रा में 60 हजार से ज्यादा लोग शामिल हुए. अब फ्लॉयड का स्टैच्यू भी बनाया जाएगा. 

क्या है पूरा मामला 

यह पूरा मामला एक वीडियो क्लिप के साथ शुरू हुआ था. इस वीडियो में George Floyd नाम के अश्वेत शख्स को पुलिस ने हिरासत में लिया था. पुलिस ने उन्हें 20 डॉलर के नकली नोट के इस्तेमाल के आरोप में पकड़ा था. जो वीडियो क्लिप वायरल हुई उसमें पुलिसकर्मी ने फ्लॉयड की गर्दन को घुटने से दबाया था और उसे सांस लेने में दिक्कत हो रही थी. वीडियो में जॉर्ज लगातार कहते हुए सुनाई दे रहे थे I Can’t Breath यानी की मैं सास नहीं ले पा रहा हूं, पुलिसकर्मी ने फ्लॉयड(George Floyd) की बात अनदेखी की और इसी दौरान जॉर्ज ने दम तोड़ दिया. 

George Floyd की मौत ने पूरे अमेरिका को झकझोर कर रख दिया. लोग पुलिस के खिलाफ रंगभेद का आरोप लगाते हुए सड़कों पर उतर आए. मौत से पहले जॉर्ज के आखिरी शब्द इस आंदोलन का नारा बन गया. हालात इतने बिगड़ गए कि खुद राष्ट्रपति ट्रंप ने इस घटना पर अफसोस जाहिर करना पड़ा. पुलिस को घुटनों के बल बैठकर अपने व्यवहार के लिए जनता से माफी मांगनी पड़ी. George Floyd के लिए इंसाफ मांगते लोग जब व्हाइट हाउस के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे तो एक हल्की धक्का-मुक्की के बाद हालात इतने बिगड़े कि दुनिया के सबसे शक्तिशाली शख्स को एक बंकर में छिपाकर लाना पड़ा. 

क्या जॉर्ज वाकई इस सम्मान के काबिल था

46 साल के अश्वेत जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद मिनेपोलिस शहर से शुरू हुआ आंदोलन ने अपनी चपेट में करीब 40 शहरों को ले लिया. इतने बड़े आंदोलन के बीच सवाल उठता है कि क्या फ्लॉयड वास्तव में इस सम्मान का हकदार था. जॉर्ज कई अपराधों के चलते 7 बार जेल जा चुका था. उसकी मौत जरूर आसामान्य थी लेकिन लोगों को यह नहीं भूलना चाहिए कि उसकी मौत से उपजे आंदोलन ने अमेरिका को खासा नुकसान पहुंचाया है. सवाल उठता है कि क्या जॉर्ज को हीरो बनाकर राजनीति की जा रही है. 

अमेरिका पर करीब से नजर रखने वाले लोगों का कहना है कि मीडिया ने जिस तरह इस मामले को दिखाया, अमेरिका की जमीनी हकीकत वैसी नहीं है. एक तबका अक्सर अपने रंग की वजह से असामान्य व्यवहार का सामना जरूर करता है लेकिन यह भी एक सच्चाई है कि यही तबका अमेरिका में कई ऊंचे पदों पर सालों से आसीन है और लगातार तरक्की कर रहा है. अमेरिका में होमलेस जैसी सुविधाओं का सबसे ज्यादा फायदा यही तबका उठाता है. और एक कड़वी सच्चाई यह भी है कि जॉर्ज(George Floyd) के आंदोलन में नजर आए कई ऐसे युवा चेहरे नजर आए जो ड्रग्स और चोरी जैसे अपराधों में शामिल रहे हैं. 

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