Kim Jong-un
किम जोंग उन (क्रेडिट- इंस्टाग्राम)

1945 को प्योंगयांग के स्टेडियम में रेड आर्मी का स्वागत करने के लिए 14 अक्टूबर 1945 को एक जनसभा बुलाई गई थी. उस वक्त किम इल संग (Kim Il Sung) ने अपनी जिंदगी का पहला भाषण दिया था. उनकी उम्र उस समय केवल 33 साल की थी. उन्होंने भाषण देने के दौरान नीले रंग का तंग सूट पहना हुआ था. उनके बाल भी काफी ज्यादा कटे हुए थे, उस समय वो नर्वस दिखाई दे रहे थे। इतना ही नहीं उनसे जुड़ी एक और गंभीर बात ये सामने आई कि उन्हें ढंग से कोरियाई बुलना नहीं आता था। क्योंकि उन्होंने निर्वासन में 36 साल बताएं थे.

इन सबके बीच कोरिया के नेतृत्व के लिए सोवियत प्रशासन की चो मन सिके पहली पसंद बने हुए थे. क्योंकि किम (Kim Il Sung)का पहला भाषण फ्लॉप रहा था. लेकिन फिर भी किम ने हार नहीं मानी. क्योंकि स्टालिन की टीम को इस बात का पता चल गया था कि चो न तो कम्युनिस्ट से ताल्लुक रखते हैं औऱ न ही कठपुतली की तरह नचाने का प्रयास किया सकता है. इन सबके बीच में देश को चलाने के लिए चो ने रूसियों से खीज दिलाने की मांग करना शुरू कर दी थी. लेकिन रूसियों को ये महसूस होने लगा था कि किम इल संग (Kim Il Sung) फन के लिए लाभप्रद और कहना मानने वाले विकल्प है.

इसके बाद अचानक से रूसियों को इश बात का एहसास हो गया कि किम इल संग उनके लिए बेहद फायदेमंद और कहना मानने वाले एक विकल्प के तौर है। इसके बाद 9 सितंबर 1948 को डेमोक्रेटिक पीपल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया की नींव रखी गई थी और किम इल संग को उशका नेता बनाया गया था। तुरंत जापान के खिलाफ संघर्ष में भाग लेने वाले लोगों में शामिल कर कोरियन पीपल्स आर्मी को बना डाला था। दक्षिण कोरिया पर हमला करने के लिए स्टालिन की मदद को कोशिश थी। स्टासिन ने अपनी तरफ से साफ कह दिय था उत्तर कोरिया को तभी जवाब देना चाहिए, जब उस पर हमला किया जाए।

जापान में मौजूद अमेरिकी सेना के कमांडर जनरल डगलस मेकार्थर इस हमले से थोड़े हैरान हुए, लेकिन उन्होंने इस पर तुरंत ही कार्रवाई करते हुए सोल के पश्चिम में इंचियान के पास अपने सैनिक उतार दिए थे। इसके छह महीने के बाद उत्तरी कोरिया की सेना वापस वहां पर लौट आई जहां से उसने शुरूआत की थी। ढाई साल तक दोनों एक-दूसरे पर हमला करते रहे लेकिन कोई भी निर्णय नहीं निकला।

इस जबरदस्त बर्बादी के बाद जब उत्तरी कोरिया और दक्षिण कोरिया को ये पता लग गया कि दोनों पक्ष 27 जुलाई 1953 को युद्ध विराम के लिए सहमत हो गए थे। लड़ाई खत्म होने के बाद किम इल संग ने उत्तरी कोरियो में अपनी स्थिति मजबूत बना ली। 10 सालों तक पार्टी की सरकार ने अपनी पकड़ लोगों के बीच इतनी मजबूत बना ली कि सरकार ये तय करने लगी कि लोग क्या पढ़ेंगे और क्या कहेंगे।

व्यक्ति पूजा का था गजब का आलम (Kim Il Sung)

उत्तरी कोरिया में व्यक्ति पूजा का जबरदस्त आलम देखने को मिला था। उन जगहों पर फिल्में बनाई गई जहां किम के कभी पैर पड़े थे। जहां कभी किम इल संग ने आराम किया था वह दर्शनीय स्थल बना दिया गया। ये कह सकते हैं कि उत्तरी कोरिया में किम इल संग हर जगह पाए जाते थे।

तीन हिस्सों में बांटी जनसंख्या (Kim Il Sung)

इस तरह के माहौल के साथ-साथ की जगहों पर डर का भी माहौल देखने को मिला था। महान नेता के प्रति किसी भी तरह का असम्मान नहीं सहा जाता था। उत्तरी कोरिया की सारी जनसंख्या को तीन हिस्सों में बांट दिया गया। पहले हिस्से को मूल वर्ग कहा जाता है। दूसरे को ढुलमुल वर्ग और तीसरे हिस्से को विरोधी वर्ग करार दिया गया था।

किम के चित्र के आगे सिर झुकाते लोग (Kim Il Sung)

1972 में किम को पार्टी के अध्यक्ष के साथ-साथ राष्ट्रपति भी घोषित कर दिया था। किम की 60 वीं वर्षगांठ के बाद टेलीविजन ने दिखाना शुरू कर दिया था कि लोग कारखानों में अपनी शिफ्ट शुरू करने से पहले किम के सामने अपने सिर को झुकाते हैं। इतना ही नहीं शिफ्ट खत्म होने के बाद उनसे फिर से अपेक्षा कि जाती है कि लोग किम के चित्र के आगे सिर झुकाएं।

8 जुलाई को 1994 में किम इल संग का निधन हो गया था। 34 घंटे तक उनकी मौत के बारे में लोगों को जानकारी नहीं दी गई थी। बाद में रेडियो प्योंगयांग पर इस बात की घोषणा की गई है कि वो अब इस दुनिया में नहीं रहे हैं। पूरे देश में 10 दिन के शोक की घोषणा कर दी गई। सत्ता में इसके बाद उनके पुत्र किम जोंग इल आए। उन्हीं की देखरेख में उनके पार्थिव शरीक को एक बड़े मकबरे में ले जाकर एंबाम करके रखा गया। ताकि वो हमेशा सुरक्षित रहे। सत्ता में इसके बाद उनके पुत्र किम जोंग इल आए। उन्हीं की देखरेख में उनके पार्थिव शरीक को एक बड़े मकबरे में ले जाकर एंबाम करके रखा गया। ताकि वो हमेशा सुरक्षित रहे। इस समय किम संग के पौत्र किम जोंग उत्तरी कोरिया के नेता हैं और उनकी तानाशाही के किस्से पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है।

Leave a Reply