Maulana Muhammad Saad

24 फरवरी को उत्तरपूर्वी दिल्ली के इलाकों में बड़े पैमाने पर फैले दंगे (Delhi Riots) में अब तब्लीगी जमात (Tablighi Jamaat) और मौलाना साद (Maulana Muhammad Saad) का नाम सामने आ रहा है. दिल्ली पुलिस (Delhi Police) के अनुसार शिव विहार इलाके में हुए दंगे में राजधानी स्कूल के मालिक फैजल फारुख की भूमिका अहम थी. अब उसकी कॉल डिटेल से पता चला है कि दिल्ली दंगे (Delhi Riots) से पूर्व वह लगातार तब्लीगी जमात, देवबंद जैसे कट्टरपंथी इस्लामिक संगठनों के अलावा पिंजरा तोड़ और जामिया मिल्लिया इस्लामिया की कॉर्डिनेशन कमेटी जैसे तथाकथित छात्र संगठनों से लगातार संपर्क में था. पुलिस के अनुसार इन सभी संगठनों के सदस्यों ने लंबी साजिश के तहत दिल्ली दंगों को अंजाम दिया था.

इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने अपनी चार्टशीट में बताया है कि मौलाना साद (Maulana Muhammad Saad) ने जबसे निजामुद्दीन मरकज़– तब्लीगी जमात में अपनी स्थिति को मजबूत किया है, उसी के बाद से फैजल फारुख ने उत्तरपूर्वी दिल्ली में काफी संपत्ति बनाई है. पुलिस इन दोनों के आपसी संबंध तथा तब्लीगी जमात की दिल्ली दंगे में भूमिका की भी जांच कर रही है.

शिव विहार इलाके में हुई बर्बरता का मुख्य साजिशकर्ता है फैज़ल

शिव विहार इलाके में एक स्कूल में आग लगाने के बाद भीड़ ने दो पार्किंग लॉन में भी आग लगाई थी. इसके बाद भीड़ ने अनिल स्वीट्स में भी आग लगा दी थी. इसी आगजनी में दिलबर नेगी की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी. भीड़ ने पहले दुकान पर पथराव किया, उसके बाद गोदाम में घुस गई. गोदाम में ही छुपे दुकान के 20 वर्षीय कर्मचारी अनिल नेगी के हाथ-पैर और गर्दन काटने के बाद भीड़ ने पूरी दुकान में आग लगा दी, जिसमें नेगी का शव भी जल गया. नेगी 6 महीने पूर्व ही उत्तराखंड से दिल्ली आया था. बाद में दिल्ली भाजपा के नेता और दिल्ली दंगों के दौरान विपक्ष के निशाने पर रहे कपिल मिश्रा ने नेगी के परिवार को तीन लाख रुपये की आर्थिक मदद दी.

तब्लीगी जमात की भूमिका है संदिग्ध

मौलाना साद का नाम मार्च में कोरोना वायरस फैलाने के बाद मीडिया में आया. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उसकी तकरीरों के कारण ही तब्लीगी जमात से जुड़े लोग प्रशासन का सहयोग नहीं कर रहे थे. उस समय स्वास्थकर्मियों पर हुए सिलसिलेवार हमलों के कारण जमात के अंदर की छिपी कट्टरपंथी विचारधारा खुलकर सामने आ गई थी. ऐसे में दंगों में तब्लीगी जमात की भूमिका होने की संभावना और भी बढ़ जाती है, हालांकि सच तो पुलिस की जांच और कोर्ट के फैसले के बाद ही सामने आएगा.

आप विधायक का नाम भी आया सामने

पुलिस के अनुसार आप विधायक हाजी यूनुस ने साद और फैज़ल के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी. भाजपा नेता अमित मालवीय ने 1 मार्च को किये अपने एक ट्वीट में भी हाजी यूनुस को दंगो में भूमिका को लेकर घेरा था. हालांकि हाजी यूनुस ने आरोपों से इंकार किया है, लेकिन अगर आप पार्षद ताहिर हुसैन के बाद यूनुस भी जांच के घेरे में आते हैं तो इस बात को लेकर आम आदमी पार्टी और भाजपा के बीच राजनीतिक टकराव अवश्य होगा.

Leave a Reply