pm modi leh visit
PM Modi Leh Visit: चीन को उसी के अंदाज में आंखें दिखे रहे हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

PM Modi Leh Visit: भारत चीन करीब पिछले दो महीने से LAC पर एक दूसरे के सामने डटे हुए हैं. चीन भारत संघर्ष (India China Clash) के तीन प्रमुख कारण हैं जिनमें पहला और सबसे महत्वपूर्ण कारण है कि चीन की PLA गलवान घाटी को पूर्णतः अपने कब्जे में रखना चाहती है जिससे गलवान घाटी (Galwan Valley) के बिल्कुल नजदीक से होकर जाने वाली दौलतबेग ओल्डी (Daulat Beg Oldi) सड़क पर उसे सामरिक बढ़त हासिल हो जाए. साथ ही भारत एशिया और हिन्द महासागर में चीन के लिए गंभीर चुनौती बने उससे पहले ही चीन अपनी आक्रामक विदेश नीति से भारत को दबाना चाहता है. चीन का अंतिम उद्देश्य सरकार के खिलाफ बढ़ते जनाक्रोश को रोकना है. कोरोना वायरस (Coronavirus) संक्रमण की खबरों को दबाने और महामारी को संभालने में हुई असफलता के कारण चीन के लोगों में जो गुस्सा उबल रहा है, चीन की सरकार उसे राष्ट्रवाद के प्रभाव से कम करना चाहती है, इसीलिए उसने भारत से संघर्ष का रास्ता चुना है.

अब तक चीन इन सभी उद्देश्यों में असफल होता दिख रहा है, या यूं कहें कि उसका हर दांव उल्टा पड़ रहा है.

चीन की आक्रामकता के बाद भारत के सड़क निर्माण कार्य में आई तेजी/ PM Modi Leh Visit

गलवान घाटी पर भारत ने चीन को पुनः मई 2020 की स्थिति बहाल करने को कहा है. इसके अलावा भारत सरकार ने सीमावर्ती क्षेत्रों में हो रहे सड़क निर्माण कार्य का बजट 10% बढ़ा दिया. गलवान घाटी के समीप श्योक नदी पर बन रहे जिस पुल को रोकने के उद्देश्य से चीन भारत पर दबाव बना रहा था वह भी बनकर तैयार हो गया, साथ ही अरुणांचल प्रदेश में भी सामरिक महत्व के दो नए पुल बनकर तैयार हो गए हैं. चीन से लगी सीमा पर 32 सड़कों को सरकार ने चिन्हित किया है, जिनका कार्य जल्द ही पूरा किया जाएगा. गौरतलब है ये तैयारियां तब हो रही हैं जब सरकार चीन सीमा से लगे 75 फीसदी प्रोजेक्ट पहले ही पूरे कर चुकी है। यह चीन को भारत का स्पष्ट संदेश है की वह चीन के दबाव में अपने Infrastructure Project बंद नहीं करेगा.

भारत की चीन नीति में व्यापक बदलाव/PM Modi Leh Visit

भारत की रक्षात्मक विदेश नीति के कारण भारत चीन के आंतरिक मामलों पर या तो चीन के साथ रहता था या मौन रहता था. जबकि चीन कश्मीर सहित तमाम मुद्दों पर भारत के लिए मुसीबत बनता रहा है. पर हाल फिलहाल में भारत ने रक्षात्मक के बजाए आक्रामक नीति अपनाई है. भारत ने अपने दो सांसदों को ताइवान की राष्ट्रपति के शपथग्रहण समारोह में हिस्सा लेने दिया. सांसद मीनाक्षी लेखी ने शपथग्रहण समारोह में दिये भाषण में ताइवान की लोकतांत्रिक पद्धति की तारीफ करते हुए आपसी सहयोग बढ़ाने की बात की. यह चीन को अप्रत्यक्ष किंतु स्पष्ट संदेश है कि भारत अपनी पारंपरिक One China Policy में बदलाव कर सकता है. इतना ही नहीं भारत की प्रसार भारती ने तिब्बती लोगों को अपने कार्यक्रम में स्थान देकर तिब्बत को एक मंच दिया है. भारत ने बड़ा कदम उठाते हुए हांगकांग के मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग में उठाया. यह पहली बार है जब भारत चीन के आंतरिक मामलों को इसी प्रकार उठा रहा है जैसे समय समय पर चीन भारत के साथ करता रहा है.

प्रधानमंत्री का लदाख दौरा इसलिए है महत्वपूर्ण/PM Modi Leh Visit

ऐसे समय में जब चीन गलवान झड़प में मारे गए अपने सैनिकों की संख्या छुपा रहा है, भारत के प्रधानमंत्री ने लेह का दौरा करके अपने सैनिकों का हौसला बढ़ाया है. यह चीनी सेना के मनोबल पर मनोवैज्ञानिक प्रहार है, इसके साथ ही चीन की सरकार पर दबाव बनाने का सफल प्रयास भी है. चीन की सरकार का मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स लगातार भारत पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है, इसलिए प्रधानमंत्री का यह दौरा और भी महत्वपूर्ण है. लंबे समय से पश्चिमी देशों के विशेषज्ञ इस बात को लेकर आशंकित रहे हैं कि क्या भारत चीन के विरुद्ध पश्चिम का साथ देने की हिम्मत जुटाएगा. लेह जाकर प्रधानमंत्री ने भारत की विदेशनीति में आये आक्रामक बदलाव को दुनिया के सामने स्पष्ट कर दिया है.

1 COMMENT

Leave a Reply