Asaduddin Owaisi

पश्चिम बंगाल (West Bengal) में चुनाव होने वाले जिसको लेकर देश की कई पार्टियां सक्रिय हो गई है. ऐसे में असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने इस चुनाव में एंट्री मार ली है. हाल ही में उन्होंने धर्मगुरु से मुलाकात की है. ऐसे में ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) को नुकसान होगा या नहीं ये तो देखने वाली बात है. लेकिन इस चीज से हर कोई हैरान है कि वो यहां चुनाव लड़ेंगे. आइए जानते हैं कि ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने आखिर कैसे राजनीति की दुनिया में अलग ही कमाल किया हुआ और कैसे उनके बेटे उनका नाम रोशन कर रहे हैं.

आंध्र प्रदेश के हैदराबाद के ओल्ड सिटी में 40 साल से अधिक समय से ओवैसी परिवार (Owaisi Family) का राजनीति की दुनिया में काफी असर रहा है, मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन पार्टी जोकि सुल्तान सलाउद्दीन ओवैसी (Sultan Salahuddin Owaisi) के जरिए हैदराबाद ओल्ड सिटी में शुरू की गई थी. लोगों के बीच बढ़ती हुई लोकप्रियता को देखकर ओवैसी मुसलमानों के नेता के नाम से मशहूर हो गए.

हैदराबाद में लोकसभा के लिए 1984 में वो पहली बार चुने गए थे. इतना ही नहीं विधानसभा में भी उनकी पार्टी के सदस्यों की संख्या बढ़ी. लेकिन इन सबके बीच पार्टी पर एक सांप्रदायिक दल होने का आरोप लगा. इसके बावजूद आंध्रप्रदेश की बड़ी पार्टियां यहां हम बात कर रहे हैं कांग्रेस और तेलुगुदेसम की जिसने उसके साथ अलग-अलग समय पर गठबंधन बनाए रखा.

हैदराबाद में 13 मई 1969 को हैदराबाद में जन्म हुआ था. वो पेशे से एक वकील है और लंदन से उन्होंने अपनी डिग्री हासिल की है. चारमीनार विधानसभा सीट से उन्होंने 1994 में चुनाव जीता था. 1999 में 90 हजार वोटों के साथ उन्होंने इसी सीट के लिए तेलुगु देशम पार्टी के सैयद शाह नूर हक खादरी को हराया था.

दोनों बेटों (Akbaruddin Owaisi और Asaduddin Owaisi) ने ओवैसी का नाम किया था रोशन

सलाउद्दीन ओवैसी के दोनों बेटे अकबूरद्दीन (Akbaruddin Owaisi) और असदउद्दीन (Asaduddin Owaisi) ने उनकी विरासत को शानदार तरीके से निभाया है. दोनों अपने पिता के नक्शे कदम पर चलते हुए नजर आ रहे हैं. अकबरूद्दीन ओवैसी एक विधायक हैं और असदउद्दीन ओवैसी सांसद हैं. ओल्ड सिटी का बाहुबली अकबरुद्दीन को माना जाता है. उनके पिता सलाउद्दीन ओवैसी ने हैदराबाद ओल्ड सिटी में पत्तार्गुत्टी से चुनाव लड़ा था और बाद में हमेशा ओल्ड सीटी से वो चुनाव लड़े और उनकी जीत भी हासिल हुई.

जब हैदराबाद एक स्वतंत्र राज्य हुआ करता था और नवाबों का शासन था उस वकत एमआईएम को 1936 में नवाब नवाज किलेदार ने शुरू किया था. एक सांस्कृति के तौर पर पहले मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन को देखा जाता था. लेकिन मुस्लिम लीग के साथ जुड़ने के बाद वो ये पूरी तरह से एक राजनीतिक संगठन के तौर पर बदलाता हुआ नजर आया और उसके बाद राजनीतिक पार्टी का गठन हुआ.

MIM पार्टी का हैदराबाद के राजकारों से अनोखा और गहरा रिश्ता रहा है. रजाकर हमेशा से ही हैदराबाद की रियासत को भारत में शामिल करने के पूरे खिलाफ थे. यहीं वजह था कि 1948 से 1975 तक एमआईएम बैन किया गया था. जब 1957 में इस संगठन पर से बैन हटा लिया गया था तो ओवैसी परिवार के हाथ में पार्टी की कमान हासिल की गई थी. 1957 में पार्टी के साथ ऑल इंडिया नाम जोड़ा गया था. साथ ही अपने संविधान को भी बदला था.

रचा ये शानदार इतिहास

AIMIM ने अपने चुनावी जीत 1960 में दर्ज की थी. वहीं, हैदराबाद नगर पालिका के लिए सलाहुद्दीन ओवैसी चुने गए और बाद वो विधानसभा के सदस्य बने थे तब से इस पार्टी की ताकत बढ़ती गई. इस पार्टी ने 2009 के विधानसभा चुनाव में सात सीटें जीती थी जोकि अपने इतिहास में मिलने वाली सब से ज्यादा सीटें थी.

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