Ram Janmabhoomi ram Temple

Ram Janmabhoomi: अयोध्या के राजा रामचंद्र को हमारे शास्त्रों ने भगवान का दर्जा दिया है. पिछली कई सदियों से हम उनके चरित्र को अपने जीवन का आदर्श मानते आए हैं. वह राजाओं के संत भी थे और संतों के राजा भी. जब राजा राम चंद्र राजगद्दी पर बैठे तो उनकी प्राथमिकता सदैव न्याय की रही और जब उन्होंने वनवासी बनकर जंगलों का विचरण किया तो त्याग को सबसे आगे रखा. भगवान राम (Lord Rama), सिर्फ हिंदुओं के नहीं बल्कि कई अन्य धर्म को मानने वाले के लोगों के भी मन और मस्तिष्क में वास करते हैं. गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित ‘रामचरितमानस’ के अनुसार राम का संपूर्ण जीवन त्याग, तप, तेज और संस्कारों के ईर्द-गिर्द ही रहा. उन्होंने मनुष्य रूप में भी सभी गुणों को अपने जीवन काल में चरितार्थ किया. इसीलिए सभी ने उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम राम नाम से स्वीकार किया. उनके कथन भूतकाल में भी तर्कसंगत थे, आज की स्थिति पर भी सटीक बैठते हैं और भविष्य में भी लोगों का मार्गदर्शन करते रहेंगे. मिसाल के तौर पर उनका एक कथन जिसे सुंदरकांड में पढ़ा जा सकता है.

“सचिव बैद गुरु तीनि जौं, प्रिय बोलहि भय आस।
राज धर्म तन तीनि कर होइ बेगही नास।।”

उन्होंने विभीषण से एक चर्चा के दौरान यह कहा था जिसका मतलब है कि मंत्री, वैद्य और गुरु अगर लोभवश या डर के कारण ‘मीठे वचन’ बोलते हैं तो राज्य, शरीर और धर्म का नाश निश्चित है. यदि आप इस एक कथन के भावार्थ को समझेंगे तो शायद उनके दर्शन को भी समझ पाएंगे. एक लंबी कानूनी लड़ाई के बाद राम मंदिर को बनाने की अनुमति मिली है. करीब ढाई दशक तक इस मंदिर को अखबारों और समाचारों में हमने ‘विवादित ढांचा’ के संबोधन के तौर पढ़ा और सुना है. कल्पना कीजिए उन लोगों की भावनाओं की जिन्होंने इस मंदिर के लिए अपना जीवन न्योछावर कर दिया./ Ram Janmabhoomi

Ram Janmabhoomi का भव्य कार्यक्रम

राम मंदिर का नया मॉडल Photo Source: NDTV

राम मंदिर (Ram Temple) भव्यता इसकी लंबे इंतजार का प्रतीक है. भूमि पूजन के लिए खुद पीएम मोदी 5 अगस्त को अयोध्या में होंगे. वह 22.6 किलो वजन की चांदी की ईंट से राम मंदिर निर्माण का शिलान्यास करेंगे. इसके अलावा देश के कोने से पवित्र धामों की मिट्टियां और नदियों का पानी लाया जा रहा है. इस आंदोलन में अपना सब कुछ न्योछावर करने वाले लोगों के शिलान्यास का यह पल बेहद भावुक होने वाला है. बताते चलें कि 5 अगस्त को अयोध्या के सरयू तट पर हजारों दीपक को जलाया जाएगा. याद करिए, दीप जलाना हमारी संस्कृति में किस बात का प्रतीक माना जाता है. सरकार ने लोगों से अपील की है कि 5 अगस्त को अपने घरों के बाहर दीप जलाएं.

राम मंदिर का निर्माण/ Ram Janmabhoomi

चांदी की ईट से होगा मंदिर का शिलान्यास (बाएं), टाइम कैप्सूल (दाएं)

जहां एक तरफ जमीन से 160 फीट ऊंचाई पर राम मंदिर के शिखर पर भगवा पताका लहराएगी तो वहीं दूसरी तरफ जमीन के 200 फुट नीचे टाइम कैप्सूल रखकर इसके इतिहास को भी सुरक्षित रखा जा रहा है ताकि भविष्य़ में किसी तरह का विवाद न हो. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस मंदिर का नक्शा तीन दशक पहले अशोक सिंहल की अगुवाई में विश्व हिंदू परिषद द्वारा तय कर लिया गया था लेकिन इसे पहले से ज्यादा भव्य बनाने के इरादे से इसमें कुछ बदलाव किए गए हैं. विश्व हिन्दू परिषद द्वारा प्रस्तावित मंदिर को अष्टकोणिय आकृति में बनाया जाना था लेकिन नए नक्शे में कुछ बदलाव किए गए हैं. पहले मंदिर के शिखर की ऊंचाई 128 फीट थी, जिसे बढ़ाकर 160 फीट से ज्यादा कर दिया गया है. अब तीन की जगह 5 गगनचुंबी गुंबद होंगे, जिनकी अगुवाई एक मुख्य शिखर करेगा. पहले मंदिर का निर्माण 2 मंज़िल का होने वाला था किंतु उसकी भी संख्या बढ़ा कर 3 कर दी गयी है. मंदिर के गर्भगृह के आकार को भी परिवर्तित कर 141 फुट से 161 फुट कर दिया गया है.

Ram Janmabhoomi को एतिहासिक बनाने में जुटी सरकार

तैयारियों को लेकर सरकार बेहद सतर्कता के साथ एक एक कदम रख रही है लेकिन विवाद का साथ यहां चोली और दामन की तरह देखने को मिल रहा है. कभी शिल्यान्यास की तारीख को लेकर हिंदू संतों की नाराजगी सामने आ जाती है तो कभी कोरोना काल में किसको आमंत्रण भेजा जा रहा है और किसे नहीं इस पर विवादों के बादल मंडराने लगते हैं. बहरहाल सरकार बिल्कुल केंद्रित होकर मंदिर के निर्माण की प्रक्रिया को ऐतिहासिक बनाने में जुटी है.

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