India China Clash

India China Clash: भारत और चीन के बीच सीमा विवाद निरंतर बढ़ता जा रहा है. 15 जून की रात को गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प में हमारे 20 जवान वीर गति को प्राप्त हुए वहीं भारतीय तथा US की रिपोर्टिंग के अनुसार चीन के कम से कम 35 जवान मारे गए हैं जिनमें एक कमांडिंग अफसर भी शामिल था. यह घटना हताहतों की संख्या के कारण तो गंभीर है ही साथ ही सबसे आश्चर्यजनक यह है कि 1975 के बाद से यह पहला मौका है जब LAC पर खून बहा है और यह झड़प इतनी बड़ी हो गई.

इस झड़प (India China Clash) के साथ ही भारत और चीन के बीच युद्ध की संभावना और बलवती हो गई है. विभिन्न विशेषज्ञ इस बात से हैरान हैं कि चीन जैसे बड़ा देश, अपनी वैदेशिक नीति में इतनी गलती क्यों कर रहा है. साथ ही यह भी हतप्रभ करने वाला है कि आज जब दुनिया में चीन से फैले Covid 19 वायरस के कारण चीन के प्रति नकारात्मक माहौल बना हुआ है, उस समय चीन भारतीय सीमा पर इतना आक्रामक रवैया क्यों अपनाए हुए है.गौरतलब है कि चीन की यह आक्रामकता लद्दाख में अधिक है. इसके कई कारणों में एक भारत तथा चीन के गिलगिट बाल्टिस्तान इलाके में परस्पर विरोधी हित भी है.

जब भारत सरकार ने अगस्त 2019 में धारा 370 और 35a को समाप्त किया था तो पाकिस्तान के अतिरिक्त चीन ने भी इसपर अपनी आपत्ति जताई थी. चीन ने यह मामला सुरक्षा परिषद में भी उठाने का प्रयास किया था. वहीं भारत के गृहमंत्री ने पुनः स्पष्ट किया था कि अक्साई चिन, पाक अधिकृत कश्मीर तथा गिलगिट बाल्टिस्तान भी भारत का हिस्सा हैं तथा भारतीय संसद इन इलाकों को पुनः प्राप्त करने हेतु प्रतिबद्ध है. जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त होने, राज्य का दो केंद्रशासित प्रदेशों में विभाजन करने तथा कश्मीर घाटी में इंटरनेट की सेवा बंद करने को लेकर भारत सरकार की पश्चिमी देशों में लिबरल दलों द्वारा आलोचना हुई.

किंतु इंग्लैंड में बोरिस जॉनसन की जीत तथा अमेरिका में बर्नी सैंडर्स की जगह Joe Biden को डेमोक्रेट्स का उम्मीदवार बनाए जाने के बाद दोनों देशों में भारतीय फैसले के प्रति, लिबरल दलों ने भी सकारात्मक बदलाव दिखाया है. भारतीय राजनीति में भी अब्दुल्ला परिवार, पीडीपी तथा कांग्रेस सहित वे सभी पक्षकार इस फैसले पर अब आक्रामक नहीं दिखते। भारत सरकार देश के अंदर तथा विश्व में यह स्थापित करने में सफल हो चुका है कि जम्मू कश्मीर को लेकर हुए बदलाव स्थाई हैं.

इससे चीन को क्या समस्या है

दरअसल भारत सरकार तथा भारतीय सेना कई बार गिलगित बाल्टिस्तान तथा पाक अधिकृत कश्मीर को लेकर यह स्पष्ट कर चुकी है कि समय अनुकूल होने पर भारत इन इलाकों को पुनः प्राप्त करने का प्रयास अवश्य करेगा. यह चीन पाक इकोनोमिक कॉरिडोर के विरुद्ध है। UPA तथा NDA दोनों सरकारों में भारत ने इस प्रोजेक्ट का विरोध किया है तथा इसे भारतीय संप्रभुता में हस्तक्षेप कहा है. चीन के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वह ग्वादर बंदरगाह तक अपनी सीधी पहुंच को सुनिश्चित कर ले. चीन का 80% तेल आयातित है, चीन अपनी एनर्जी रिरोर्स के लिए अफ्रीका एवं प० एशिया पर पूर्णतः निर्भर है. CPEC चीन की ऊर्जा ज़रूरतों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है.

गिलगिट बाल्टिस्तान के पहाड़ों को पार करते ही चीन पाकिस्तान की समतल भूमि से अपनी पहुंच अरब सागर तथा आगे पश्चिम एशिया एवं अफ्रीका तक बढ़ा सकता है. द० चीन सागर में चीन के संबंध अन्य देशों से अच्छे नहीं हैं, साथ ही यह रास्ता भी CPEC की अपेक्षा लंबा है. ऐसे में चीन लद्दाख में भारत को अपनी सामरिक स्थिति सुदृढ़ नहीं करने दे सकता, जिससे भारत के ऊपर इस क्षेत्र में चीन का दबाव कम हो. यही कारण है कि चीन लगातार लद्दाख क्षेत्र में ही हस्तक्षेप कर रहा है, एवं भारत के सड़क निर्माण कार्य को रोकना चाहता है.

6 COMMENTS

  1. विस्तार से जानकारी के लिए बहुत बहुत धन्यवाद🙏💕

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