Saadat Hasan Manto

Saadat Hasan Manto: बिखरे बाल, आंखों पर ऐनक, होठों के बीच सुलगती हुई सिगरेट और कलम से समाज, सरकार और संस्कारों पर जोरदार चोट करने वाले सआदत हसन मंटों (Saadat Hasan Manto) की आज बरसी है. मंटो को हिंदुस्तान-पाकिस्तान बंटवारे पर सबसे बेहतरीन लिखने वाले लेखकों के तौर पर याद किया जाता है. कलमकार मंटो को आज भले ही याद किया जाता है लेकिन अपने जमाने में उनका जीवन विवादों से भरा रहा. समाज को आइने दिखाने के चलते उन पर अश्लीलता का आरोप लगा. अदालतों के चक्कर लगाने पड़े, जब लोग उन्हें गलत नहीं साबित कर पाए तो जेल में डाल दिया. सआदत हसन मंटों (Saadat Hasan Manto) ने अपने जीवन काफी कुछ लिखा है, जिसे सहोजकर रखा जा सकता हैं. उनके वाक्यों के बहुआयामी अर्थ जीवन की सार्थकता को समझने में मदद करते हैं. तो चलिए जानते हैं उनके बारे में.

Saadat Hasan Manto: जीवन परिचय

सआदत हसन मंटों का जन्म 11 मई 1912 को पंजाब के लुधियाना के एक गांव पड़पौदी में हुआ था. हालांकि उन्होंने अपनी रचनाओं में समराला का जिक्र किया है जोकि पड़पौदी के ही नजदीक है. मंटो के पिता गुलाम हसन मंटो कश्मीरी थी. जोकि बाद में अमृतसर चले गए थे. उनकी प्राथमिक पढ़ाई घर पर ही हुई है. साल 1931 में उन्होंने मैट्रिक पास की, मैट्रिक में वह तीन बार फेल हुए. अपने बारे में लिखते हुए मंटो ने कहा था कि दसवीं की परीक्षा में तीन बार फेल हुए थे.

Saadat Hasan Manto ने क्या क्या लिखा

कहते हैं मंटो की जिंदगी पर जलियांवाला बाग घटना की गहरी छाप पड़ी थी. इसी के बाद से उन्होंने लिखना शुरू किया था और अपनी पहली कहानी तमाशा लिखा थी. उनकी प्रसिद्ध रचनाओं में टोबा टेक सिंह, बू, खोल दो और ठंडा गोश्त शामिल हैं, हालांकि अपने छोटे से जीवन काल में उन्होंने ढेरो रचनाएं लिखी. जिसमें बाइस लघु कथा संग्रह, रेडियो नाटक के पांच संग्रह, कई रचनाओं के तीन संग्रह, एक उपन्यास और व्यक्तिगत रेखाचित्र के दो संग्रह शामिल हैं.

मंटो ने अपने जीवन नें बात करते हुए अपनी कई घटनाओं का उल्लेख किया है, जिसमें कलम उठाने को सबसे बड़ी घटना बताया है.मंटो ने लिखा कि मेरा कलम उठाना बहुत बड़ी घटना थी, जिसकी वजह से शिष्ठ लेखकों को भी दुख हुआ और शिष्ट पाठकों को भी.

Saadat Hasan Manto का अलग मिजाज

मंटो बिल्कुल अलग मिजाज के लेखक थे, जिस तरह से मजदूर रोज मजदूरी करके अपना पेट भरता है ठीक उसी तरह मंटो भी हर रोज कहानियां लिखा करते थे. उसके एवज में जो पैसे मिलते थे, उसी से वो अपने घर का खर्चा चलाते और शराब और सिगरेट जैसी जरूरतों को पूरा करते.

सआदत हसन मंटो की रचनाए सिस्टम पर सीधी चोट करती हैं, वह समाज और संस्कारों को ढकने वाले चमकीले पर्दे को हटाकर इसकी बजाबजाहट को सबके सामने लाने का माद्दा रखती थीं और शायद इसी वजह से जब तक वह जिंदा रहे, परेशानियों ने उन्हें घेरे रखा. मंटो का अपना जीवन किसी त्रासदी से कम नहीं था. बेपरवाह सिगरेट की आदत और दिन रात शराब की लत ने उनसे सिर्फ 42 की उम्र में जिंदगी छीन ली. फिल्मकार नंदिता दास ने उनके जीवन पर एक फिल्म भी बनाई, शायद वह पहले ऐसे लेखक रहे जिन पर फिल्म बनी.

अगर आपने अब तक सआदत हसन मंटो की की रचनाओं को नहीं पढ़ा है तो इस लिंक पर क्लिक कर सकते हैं, काफी कुछ मिल जाएगा.

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