Suvendu Adhikari
शुभेन्दु अधिकारी (क्रेडिट- ट्विटर)

Suvendu Adhikari: राजनीति की दुनिया में काफी कुछ होता हुआ नजर आता है. आप सभी ने आया राम और गया राम के बारे में राजनीति में काफी सुना होगा. इसके कई उदाहरण हम देख चुके हैं. हाल ही में तृणमूल कांग्रेस के 15 पार्षद जोकि बीस सदस्यीय कोंटाई नगरपालिका में शामिल थे वो BJP का हिस्सा बन गए हैं। उन्हीं में से एक रहे हैं बीजेपी नेता और सौमेन्दु के भाई शुभेन्दु अधिकारी (Suvendu Adhikari) ने यहां एक कार्यक्रम के अंदर पार्षदों को बीजेपी पार्टी के झंडे सौंपे थे. ये सब तब देखने को मिला जब हाल ही में ममता बनर्जी की सरकार द्वारा नागरिक निकाय में प्रशासक के पद से सौमेन्दु को निष्कासित कर दिया था.

सौमेन्दु ने अपने बड़े भाई शुभेंदु की राह पर चलने का काम किया है। ऐसा हम इसीलिए कह रहे हैं क्योंकि हाल ही में वो खुद तृणमूल कांग्रेस का हाथ छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे। उनको लेकर अब ऐसा कहा जा रहा है कि वो जुट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के चेयरमैन के तौर पर नियुक्त हो सकते हैं. लेकिन इस बात में कोई शक नहीं है कि उनका जाना ममता सरकार पर आने वाले चुनाव में भारी पड़ सकता है. क्योंकि इस वक्त लोगों के मन में ये जानने की दिलचस्पी जगी हुई है कि आखिर ममता के इतने करीबी रहने वाले शुभेंदु (Suvendu Adhikari) ने क्यों बीजेपी का हाथ थामा और कैसे उन्होंने अपना राजनीतिक करियर शुरु किया? आइए आपके इस सवाल का जवाब हम यहां इस पोस्ट के जरिए आपको देते हैं।

शुभेंदु अधिकारी का जन्म बंगाल के पूर्वी मिदनापुर में 15 दिसंबर 1970 में हुआ था, शुभेंदु अधिकारी ममता सरकार के भीतर बतौर परिवहन मंत्री के तौर पर मौजूद थे. उन्होंने इस सरकार से 27 नवंबर को इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने अपना इस्तीफा देते हुए कहा कि मेरी पहचान यह है कि मैं पश्चिम बंगाल और भारत का बेटा हूं. मैं हमेशा यहां के लोगों के लिए लडूंगा.

Suvendu Adhikari: ऐसे की राजनीतिक करियर की शुरुआत

शुभेंदु अधिकार ने ग्रेजुएशन कांथी पीके कॉलेज से की और यहीं से ही राजनीतिक की दुनिया में कदम रखा था. इसके बाद वो छात्र परिषद के तौर पर प्रतिनिधि 1989 में चुने गए थे. वो 36 साल की उम्र में पहली बार 2006 में कांथी दक्षिण सीट से विधायक के तौर पर चुने गए थे. इस साल वो कांथी नगर पालिका के चेयरमैन के तौर पर भी चुने हुए थे. उन्होंने 2009 और 2014 में तुमलुक लोकसभा से सीट जीतकर संसद में एंट्री मारी थी. नंदीग्राम विधानसभ सीट से 216 में उन्होंने जीत हासिल की थी. ममता बनर्जी ने ही उन्हें मंत्री बनाया गया था.

इस आंदोलन में Suvendu Adhikari ने निभाई अहम भूमिका

1990 के दशक में जहां उन्होंने राजनीतिक करियर में भले ही कदम रखा था, लेकिन उन्होंने सियासी शुरुआत 2007 में की थी। उन्होंने 2007 के नंदीग्राम आंदोलन में अहम भूमिका निभाई थी। शुभेंदु पूर्वी मिदनापुर जिल के एक जबरदस्त प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से संबंध रखते हैं। इतना ही नहीं शुभेंदु के पिता शिशिरर अधिकारी खुद कांग्रेस के संस्थापक सदस्यों में रहे थे।

ममता से इसीलिए नाराज थे Suvendu Adhikari

ममता बनर्जी से शुभेंदु इसीलिए नाराज थे क्योंकि ममता पार्टी के दूसरे नेताओं की तुलान में अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को वो अधिक महत्व दे रही थी और उन्हं अघोषित रूप से अपना उत्तराधिकारी बना दिया है. उन्हें ये बात बिल्कुल भी पसंद नहीं थी.

2021 में ये है Suvendu Adhikari की प्लानिंग

पिछले कुछ महीनों से पूर्वी मिदनापुर जहां शुभेंदु अधिकारी पैदा हुआ थे वहां लगातार अनुगामी के पोस्टर जगह-जगह देखने को मिल रहे हैं. ऐसा कहा जा रहा है ककि 2021 विधानसभा चुनाव से पहले वो अपना खुद का संगठन खड़ा कर सकते हैं. TMC के सूत्रों की माने तो कुछ हिस्सों समेत 35 विधानसभा सीटों पर उनका रुतबा बना हुआ है.

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