US Election 2020

अमेरिका (America) एक महाशक्ति है लिहाजा वहां होने वाले राष्ट्रपति चुनावों (US Election 2020) पर दुनिया भर की निगाहें टिकी हुई हैं. जाहिर है अमेरिका (America) के चुनावों से भारत भी प्रभावित होगा. भारत के नजरिए से यह क्यों महत्वपूर्ण हैं इसे जानने से पहले अमेरिका के चुनावों के बारे में थोड़ा जान लेते हैं. अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में दो दावेदार हैं. वर्तमान राष्ट्रपति और रिपब्लिकन पार्टी (Republican) के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) और उनके प्रतिद्वंद्वी डेमोक्रेट्स पार्टी (Democratic Party) के उम्मीदवार जो बिडेन (Joe Biden). इन दोनों का अमेरिकी विदेश नीति को लेकर क्या नजरिया है एवं उसका भारत पर क्या प्रभाव पड़ सकता है, यह दोनों के अमेरिकी विदेश नीति (US Foreign Policy) को लेकर नजरिए पर निर्भर करता है. ऐसे में भारत पर क्या असर पड़ सकता है इन संभावनाओं को टटोलने की कोशिश करते हैं.

Donald Trump की Open and Free Indo Pacific Policy और India/ US Election 2020

ट्रंप Open and Free Indo Pacific नीति के समर्थक हैं और भारत की एशिया, हिन्द महासागर सहित प्रशांत महासागर में प्रमुख भूमिका चाहते हैं. ट्रंप प्रशासन का नजरिया है कि अफगानिस्तान में भी भारत की अप्रत्यक्ष किंतु महत्वपूर्ण भूमिका, अमेरिका और भारत दोनों के हित में है.

Joe Biden की विदेश नीति / US Election 2020

Joe Biden अमेरिकी विदेश नीति में व्यापक बदलाव चाहते हैं. उनका मानना है कि अमेरिका को फिर से दुनिया का नेतृत्व करना चाहिए और विश्व में मानवाधिकार और लोकतंत्र की स्थापना के लिए प्रयास करने चाहिए. जहां राष्ट्रपति ट्रम्प अमेरिका को सीरिया, अफगानिस्तान सहित तमाम मोर्चों से हटाना चाहते हैं, वहीं Joe Biden पुनः अमेरिका को दुनिया में न्यायाधीश की भूमिका में लाना चाहते हैं.

ऐसे में सवाल उठता है की क्या Biden अमेरिका को पुनः अफगानिस्तान में उलझाएंगे? यदि हाँ तो इसमें पाकिस्तान की क्या भूमिका होगी? ऐसे कई प्रश्न हैं जो भारत को अनिश्चितता की स्थिति में धकेल सकते हैं।

भारत पर Biden की नीतियों का अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ेगा/ US Election 2020

अब तक ट्रंप का रूस के प्रति रवैया नर्म है, वह चीन को सबसे बड़ा शत्रु मानते हैं. इसका फायदा यह है कि भारत रूस के साथ हथियारों का समझौता भी कर रहा है और किसी भी प्रतिबंध से बचा है. भारत ने अमेरिकी रक्षा कानून CAATSA का सीधा उल्लंघन किया है, फिर भी व्यापक वैश्विक संदर्भों में अमेरिका को चीन के खिलाफ भारत की जरूरत है, इसलिए ट्रम्प प्रशासन भारत के प्रति नर्म रहा है.

यदि हम Biden की नीतियों की बात करें तो वह रूस को अपने आक्रमण का केंद्र बनाए हुए हैं, यह भारतीय हितों के लिए गंभीर समस्या बन सकता है. रही बात चीन की तो Biden Covid 19 के कारण चीन पर आक्रामक हैं, और ट्रम्प पर चीन के प्रति नरम रवैया अपनाने का आरोप भी लगा रहे हैं, किंतु उनके ही दल के नेताओं का मानना है कि चीन के प्रति आक्रमक व्यवहार अमेरिका में रह रहे Aisan American समुदाय के प्रति नस्लीय हिंसा को बढ़ावा दे सकता है, साथ ही अमेरिका को महामारी से लड़ने और वैश्विक अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए चीन से सहयोग करना चाहिए. ऐसे में Biden चीन के प्रति कब तक और कितने आक्रामक रहेंगे, कहा नहीं जा सकता.

सबसे महत्वपूर्ण यह है कि Biden लोकतंत्र के समर्थन में अमेरिका में सालाना वैश्विक सम्मेलन करने का वादा अपने चुनाव प्रचार में कर रहे हैं. इस सम्मेलन में सरकारों के प्रतिनिधियों के साथ हर देश के प्रमुख लोकतंत्र समर्थक संगठनों, बुद्धिजीवियों को आमंत्रित किया जाएगा। उन सरकारों के साथ संघर्ष की नीति बनाई जाएगी जिन्हें अमेरिका अधिनायकवादी, Authoritarian, तानाशाही सरकार मानता है. जाहिर है ऐसी सरकारों की परिभाषा भी सम्मेलन में ही तय होगी और इस सम्मेलन में चरित्र प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा.

Biden अमेरिका को दुनिया में लोकतंत्र का वकील बनाना चाहते हैं/ US Election 2020

यह बड़ी गम्भीर समस्या पैदा कर सकता है. यह सम्मेलन न सिर्फ अन्य देशों की आंतरिक राजनीति में हस्तक्षेप है, बल्कि चुनी हुई सरकार के बजाए अन्य ऐसे संगठनों से अमेरिका के सहयोग की बात करता है जिन्हें अमेरिका लोकतंत्र समर्थक मानेगा. भारत की आंतरिक राजनीति में टकराव, इस समस्या में आग में घी जैसा काम कर सकता है. Biden हाल में ही कश्मीर और CAA-NRC को लेकर अपनी चिंता व्यक्त कर चुके हैं. उन्हीं के दल के बर्नी सैंडर्स भी भारत पर लगातार आक्रामक रहे थे। ऐसे में Biden अगर सरकार में आते हैं तो यह भारत सरकार की विदेश नीति में गंभीर चुनौती पैदा कर सकता है.

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